अथ तबादला कथा: निरस्त होने से निरस्त कराने तक


-राजेश बैरागी-
न जाने कौन कह रहा था कि तबादला निरस्त कराने के लिए पचास लाख रुपए प्रति सिर (per head)खर्च लगा। हालांकि यह बहुत ज्यादा होने से अधिक अनैतिक कहा जा रहा है।लोग सवाल करते हैं कि क्या यह सब बाबाजी की जानकारी में नहीं होगा? इसके बावजूद कुछ लोग पूछ रहे हैं कि इस कीमत पर अभी भी तबादला रुकने की संभावना बची है क्या? कथित तौर पर पचास लाख रुपए खर्च कर तबादला रुकवाने वाले लोग ऐसे तो नहीं हैं जिन्हें घर से दूर जाना बिल्कुल असहनीय हो। इन्हें इस खर्च से कई गुना निश्चित रिटर्न की गारंटी रही होगी। इस बीच बताया गया है कि एक घरेलू महिला अपने पति के चार वर्ष बाद वापस गृह क्षेत्र में तबादला होने से असहज हो गयी है। महिला के चरित्र को लेकर कोई संदेह नहीं है। दरअसल बीते चार वर्षों में उसे अपनी मर्जी से जीने की आदत पड़ गई है। पतिदेव की फिर से चख-चख, उनके लिए मनपसंद खाना बनाना और उनके अनुसार घर को व्यवस्थित रखना अब उसे समस्या लग रही है। क्या ऐसे लोगों को घर से दूर रखने का भी कोई ऑफर चल रहा है,लोग पूछ रहे हैं। विपक्ष तबादला उद्योग को मुद्दा बनाकर हवा देने की तैयारी में बताया जा रहा है।इसके विपरित नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्रबंधक स्तर के अभियंताओं की तीन तीन वर्क सर्किलों में नियुक्ति का नया धंधा खड़ा हो गया है। कीमत पच्चीस लाख रुपए तक बताई जा रही है। कनिष्ठ को वरिष्ठों पर वरियता देकर चार्ज थमाने में यमुना प्राधिकरण भी पीछे नहीं है। तबादला रुकवाने के लिए पचास लाख खर्च करना कोई बड़ी बात नहीं है। एक तबादला इसलिए निरस्त कराया गया कि इससे नोएडा प्राधिकरण की कर्मचारी संगठन की राजनीति में भूचाल आ जाता। कुछ लोग केवल अपना नहीं, अपने प्रतिद्वंद्वी का तबादला निरस्त कराने में भी जेब की बाजी लगा देते हैं। इस सब घालमेल के बीच सबसे उपेक्षित कौन है? इस लाख टके के प्रश्न का उत्तर है प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी। उनसे कोई नहीं पूछता कि उन्हें किस कर्मचारी या अधिकारी की आवश्यकता है या वे किससे काम लेने में सहज अनुभव करेंगे।(नेक दृष्टि)

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