
-राजेश बैरागी-
शहर की संपत्तियों में चल रही गतिविधियों पर गिद्ध जैसी दृष्टि रखने वाला नोएडा प्राधिकरण संभवतः सेक्टर 11 के एम-14 आवासीय भूखंड के व्यवसायिक उपयोग से अनजान है। हालांकि यह भूखंड विशेष लोकेशन के साथ सेक्टर 11-12 के चौराहे के कॉर्नर पर स्थित है और इसमें मेट्रो हॉस्पिटल का कॉरपोरेट ऑफिस चलाया जा रहा है।
इस चौराहे पर अघोषित रूप से मेट्रो हॉस्पिटल का अवैध कब्जा है। सेक्टर 12 के कॉर्नर पर मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट संचालित है जहां आने वाले रोगियों के वाहन खड़े होने की कोई वैध व्यवस्था नहीं है। दिल्ली एनसीआर के सबसे मंहगे शहर नोएडा की नियोजन परिकल्पना करने वाले वास्तुकार इंजीनियरों को जरा भी यह आभास नहीं था कि नागरिक गतिविधियां बढ़ने पर पार्किंग जैसी सुविधा की भी आवश्यकता होगी। लिहाजा अस्पताल जैसी बिल्डिंगों के नक्शे स्वीकृत करने के दौरान यह सोचा ही नहीं गया कि यहां रोगियों और उनके तीमारदारों के वाहन भी आएंगे और उन वाहनों को कुछ देर खड़ा भी रहना होगा। सेक्टर 12 के मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट के सामने और आसपास ऐसे वाहनों का जमावड़ा हमेशा लगा रहता है और इस चौराहे से निकलने वाले लोग जाम के शिकार रहते हैं। इस हॉस्पिटल के ठीक सामने सेक्टर 11 के कॉर्नर पर स्थित एम 14 भूखंड भी मेट्रो हॉस्पिटल का ही है।506 वर्गमीटर का यह भूखंड आवासीय है परंतु इसका विशुद्ध व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। यहां मेट्रो हॉस्पिटल का कॉरपोरेट ऑफिस चलता है। बाहर से देखने में यह एक शानदार कोठी जैसी नजर आती है परंतु अंदर का उपयोग आवासीय नहीं है। बेसमेंट और भूतल पर बेहद छोटे छोटे केबिन बनाए गए हैं जिनमें प्रबंधन स्टाफ काम करता है। इसमें सुरक्षा उपायों को लेकर भी सवाल उठना लाजिमी है। उल्लेखनीय है कि नोएडा प्राधिकरण ने शहर के हजारों आवासीय फ्लैट व भूखंडों पर अवैध निर्माण तथा अन्य गतिविधियां संचालित करने को लेकर धारा 10 का नोटिस जारी किया हुआ है। इसके चलते ऐसी सभी आवासीय संपत्तियों की खरीद-फरोख्त भी रुकी हुई है। परंतु जैसे समरथ को नहीं दोष गुसाईं वैसे ही मेट्रो हॉस्पिटल का नाम आते ही प्राधिकरण का परियोजना और नियोजन विभाग अपनी कार्यशैली भूल जाता है।(नेक दृष्टि)
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