नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पहली उड़ान:दिल्ली के मुकाबले अभी भी अधिक ही है किराया


-राजेश बैरागी-
मैं नहीं जानता कि हवाई यात्रा के किराए का निर्धारण कैसे किया जाता है परन्तु एक सप्ताह में नोएडा-लखनऊ उड़ान की किराया दर में तीस प्रतिशत की कमी करने के एयरलाइंस के एलान से इतना तो स्पष्ट हो ही गया है कि किराया दरों में कोई झोल तो अवश्य है।क्या एयरलाइंस कंपनियां बाजार की आवश्यकता और वास्तविकता से परिचित नहीं होती हैं? नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आगामी 15 जून को उड़ान शुरू करने वाली दोनों एयरलाइंस कंपनियों क्रमशः इंडिगो तथा अकाशा ने  पूर्व घोषित किराए में कमी कर दिल्ली के बराबर लाने का प्रयास तो किया है परंतु एक बिल्कुल नये हवाई अड्डे को यात्रियों के लिए आकर्षक बनाने की दृष्टि से नया किराया भी अधिक ही है। दिल्ली एयरपोर्ट के मुकाबले इस एयरपोर्ट को खड़ा करने के लिए एयरलाइंस के साथ साथ हवाई अड्डा संचालित करने वाली कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल के अलावा राज्य सरकार को भी यात्रियों को आकर्षित करने वाली योजनाओं पर विचार करना चाहिए।
गत 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों लोकार्पित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ान शुरू करने के लिए इंडिगो व अकाशा एयरलाइंस ने टिकट बुकिंग शुरू कर दी है। एक सप्ताह पहले शुरू हुई टिकट बुकिंग में इंडिगो ने इस हवाई अड्डे से लखनऊ और बंगलूरू के लिए दिल्ली के मुकाबले किराया अधिक रखा। मीडिया में किराए के अंतर पर सवाल उठने के बाद मंगलवार को इंडिगो के साथ अकाशा एयरलाइंस ने भी किराए में कटौती करते हुए दिल्ली के बराबर किराया घोषित कर दिया।अकाशा एयरलाइंस ने नोएडा से बंगलूरू का किराया दिल्ली के मुकाबले और भी कम रखा है। इसके बावजूद किराया दरें एयरलाइंस की व्यवसायिक सोच पर सवाल खड़े करती हैं। क्या एक नये, अविकसित और किसी भी बसे हुए शहर से दूर हवाई अड्डे पर यात्रियों को आकर्षित करने के लिए उतनी ही किराया दरें रखी जानी चाहिएं जितनी एक पूर्ण विकसित हवाई अड्डे के लिए ली जा रही हैं? नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अभी दिन के समय में भी एक निर्जन स्थान जैसा है जहां से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, पलवल, वल्लभगढ़, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़ आदि निकटतम स्थानों को जाने के लिए 25 से 50 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी। यमुना एक्सप्रेस-वे से जुड़े होने के बावजूद सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी नये आगंतुकों के लिए एक गंभीर मुद्दा है। नोएडा,ग्रेटर नोएडा,मयूर विहार को छोड़कर शेष स्थानों के लिए तत्काल और उचित किराए पर टैक्सी मिलने की भी गारंटी नहीं है। ऐसे में दिल्ली के बराबर किराए पर नोएडा हवाई अड्डे का चुनाव किसी यात्री को क्यों करना चाहिए? दिल्ली के निकट नोएडा एयरपोर्ट बनाने के विचार की शुरुआत में ही यह प्रश्न सबसे बड़ा था कि इतनी कम दूरी पर दूसरे एयरपोर्ट को कैसे चलाया जा सकेगा। हालांकि यमुना सिटी के विकसित होने के साथ इस हवाई अड्डे की आवश्यकता स्वयं सिद्ध हो जाएगी परन्तु तब तक यात्रियों को कैसे आकर्षित किया जाए?कम किराया और तेजी से सुविधाओं का विकास ही इस हवाई अड्डे की सफलता का कारण बन सकता है। इसके लिए न केवल एयरलाइंस कंपनियों बल्कि एयरपोर्ट संचालित करने वाली कंपनी तथा राज्य सरकार को भी विशेष कदम उठाने होंगे। अन्यथा यह हवाई अड्डा भी उत्तर प्रदेश के कई दूसरे नये हवाई अड्डों की तर्ज पर गिनती में तो शामिल रहेगा परन्तु यात्रियों और उड़ानों के लिए प्रतीक्षा ही करता रहेगा।(नेक दृष्टि)

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