
-राजेश बैरागी-
चर्चा ए आम है कि बदले निजाम और बदले माहौल में नोएडा प्राधिकरण और मानसून की अंदरखाने सेटिंग हो गई है। इस बार या तो मानसून बरसेगा नहीं और बरसेगा तो प्राधिकरण से पूछकर। मुझे यह कहने का साहस इसलिए हुआ है क्योंकि जून शुरू हो चुका है और शहर की जीवनरेखाएं समझे जाने वाले नाले और नाली गंदगी व गाद से बजबजा रहे हैं परंतु प्राधिकरण के सिविल वर्क सर्किलों में विखंडित जन स्वास्थ्य विभाग अभी तक पूरी तरह टेंडर प्रक्रिया शुरू भी नहीं कर पाया है।
क्या नोएडा में मानसून इस वर्ष एक दो महीने देरी से या नहीं आने की संभावना है? प्राधिकरण द्वारा दस सिविल वर्क सर्किलों में विखंडित स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहर के लगभग 352 किलोमीटर लंबे सैकड़ों खुले और ढंके नालों व पुलिया आदि की साफ सफाई की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं बन पाई है। बताया जा रहा है कि बदले निजाम और बदली व्यवस्था में भारी भरकम बजट डकारने के लिए नालों की सफाई का साइज़ बढ़ाने और बड़े बड़े टेंडर तैयार करने में मानसून के आने पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शहर को विकसित करने के साथ नागरिक सुविधाओं की भी जिम्मेदारी उठाने वाले नोएडा प्राधिकरण को संभवतः आने वाले मानसून और उससे होने वाले जलभराव की कोई सुध नहीं है। जून शुरू हो चुका है परंतु शहर के नालों व पुलिया आदि की सफाई की तैयारी नहीं है। नोएडा प्राधिकरण का सेक्टर -6 स्थित मुख्य कार्यालय ही प्रत्येक बार बारिश होने पर डूब जाता है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यालय का कुछ भाग अतिक्रमण कर जिस नाले पर रखा गया है,उस नाले का पानी ही आगे ऊंच-नीच के चलते कहीं बहकर नहीं जाता। यह हाल प्राधिकरण के अन्य कार्यालयों का भी है जो दूसरे सेक्टरों में अवस्थित हैं। क्या इस बार नालों की सफाई बारिश के दौरान होगी?तब सड़कों का नजारा कुछ खास हो सकता है।(नेक दृष्टि)
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