ऑनलाइन डिलीवरी फील्ड में जाने से गारमेण्ट एक्सपोर्ट उद्योग को झेलना पड़ रहा है श्रमिकों का टोटा


-राजेश बैरागी-
हुए नामवर बे-निशाँ कैसे-कैसे,ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे-कैसे!- अमीर मीनाई
क्या आप जानते हैं कि कभी गारमेण्ट एक्सपोर्ट औद्योगिक इकाइयों में काम करने के लिए लालायित रहने वाले श्रमिक आजकल ऑनलाइन डिलीवरी क्षेत्र की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं? नोएडा के सेक्टर 24 स्थित अपै्रल ट्रेनिंग एंड डिजाइनिंग सेंटर में आज बुधवार को एक प्रेस वार्ता में गारमेण्ट एक्सपोर्ट क्षेत्र के उद्यमियों तथा अधिकारियों ने यह रहस्योद्घाटन करते हुए बताया कि इस पलायन से कपड़ा उद्योग को श्रमिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
‘एक जिला-एक उत्पाद’ के तौर पर जनपद गौतमबुद्धनगर को गारमेण्ट एक्सपोर्ट के लिए पहचाना जाता है। यहां नोएडा में साढ़े चार हजार कपड़ा बनाने वाली औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं। दावा किया जाता है कि इनमें दस लाख लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध है। परंतु हमेशा पच्चीस प्रतिशत श्रमिकों की कमी के साथ यह उद्योग चलता है।गत अप्रैल माह में श्रमिकों के हिंसक आंदोलन से श्रमिकों की कमी और बढ़ी है। प्रत्येक अपै्रल औद्योगिक इकाइ के बाहर कुशल अकुशल श्रमिकों की आवश्यकता वाले बोर्ड टंगे हुए हैं परन्तु श्रमिक मिल नहीं रहे हैं। अपै्रल ट्रेनिंग एंड डिजाइनिंग सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में नोएडा कपड़ा उद्योग टाइकून ललित ठुकराल ने बताया कि उनके उद्योग में काम करने वाले श्रमिक अच्छी आमदनी और व्हाइट कॉलर जॉब के लालच में आनलाइन डिलीवरी जैसे क्षेत्र में पलायन कर रहे हैं। इससे उद्योग को कुशल अकुशल श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उनके संगठन द्वारा जनपद के सैकड़ों गांवों में शिविर लगाकर कपड़ा उद्योग के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है परंतु महिलाएं घर से निकलकर फैक्ट्री आने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि ईरान अमेरिका युद्ध से उत्पन्न संकट धीरे धीरे छंट रहा है और उद्योग को ऑर्डर मिलने शुरू हो गये हैं। प्रेस वार्ता को एटीडीसी के महानिदेशक डॉ रूपम वशिष्ठ, जिला उद्योग उपायुक्त पंकज कुमार, ग्रुप सेंटर हेड डॉ गुरप्रीत कौर ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर नोएडा के कपड़ा उद्यमी रौशन बैद्य,नीरज तथा राजकुमार आनंद भी उपस्थित थे।(नेक दृष्टि)

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