-राजेश बैरागी-
स्थानीय निकाय के कर्मचारी सड़क किनारे लगी पाव भाजी की रेहड़ी हटा रहे थे।सामान जब्त करने के क्रम में गैस सिलेंडर की बारी भी आ गई। निगम कर्मी सिलेंडर उठाने लगा तो रेहड़ी लगाने वाली महिला सिलेंडर से चिपट गई। निगम कर्मी ने हल्का बल प्रयोग किया परन्तु महिला ने सिलेंडर नहीं छोड़ा। उसने सिलेंडर जब्त न करने के लिए निगम कर्मी के पैरों को भी हाथ लगाया। परंतु हुक्म के गुलाम निगम कर्मी ने फिर भी सिलेंडर लेने का प्रयास किया। इस बीच उससे बड़े पदाधिकारी को संभवतः दया आ गई।उसने उसे सिलेंडर छोड़ने का आदेश दिया। महिला का खोमचा उजड़ गया था।उसका हजारों रुपए का सामान और रोजी-रोटी कमाने का साधन जब्त कर लिया गया था। अगले कुछ दिनों तक खाने और कमाने का प्रबंध कैसे होगा,यह तय नहीं है। एक कहावत प्रसिद्ध है कि एक बार उठी पैंठ(साप्ताहिक बाजार) कभी कभी आठ दिन में नहीं भी जुड़ती है। सड़क किनारे रेहड़ी पटरी लगाकर अपना और बच्चों का पेट भरने की जुगत लगाने वाले प्रवासी-अप्रवासी लोगों की यही जिंदगी है। बड़े बड़े शहर बसाए जाएं या शहर बड़े हो जाएं, दैनिक श्रमिकों के बिना इन शहरों का गुजारा नहीं है।ये श्रमिक भी गुजारे के लिए शहर आते हैं। रिक्शा,ठेला चलाने वाले, बेलदार, वर्कशॉप के कर्मचारी, कुली और पल्लेदार जैसे हजारों श्रमिक हल्दीराम या डोमिनोज के ग्राहक नहीं हैं। सस्ता खाना सड़क किनारे रेहड़ी पटरी पर मिलता है। रेहड़ी पटरी के लिए छोटे से छोटे और बड़े से बड़े शहर में कोई वैध ठिकाना नहीं होता है।जब तक स्थानीय निकाय की मेहरबानी चलती है तब तक सड़क किनारे रेहड़ी पटरी चलती हैं। एक बार उजड़ जाएं तो क्या मालूम फिर कब बसना नसीब हो। यही उस पाव भाजी बेचने वाली महिला का नसीब है। खोमचा उजड़ने से मानो उसकी किस्मत ही उजड़ गई परन्तु निगम कर्मियों की उदारता से वह अपना गैस सिलेंडर बचाने में कामयाब हो गयी। ऐसा लग रहा था जैसे दो बेवकूफों की लड़ाई के बीच जलडमरूमध्य से एलपीजी भरा टैंकर निकल आया है।वर्तमान में गैस सिलेंडर मानव जाति के अस्तित्व का प्रतीक बन गया है। गैस नहीं तो खाना नहीं। खाना बगैर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती और एक महिला के लिए गैस सिलेंडर की कीमत केवल उतनी नहीं है जितने में वह आता है। आज की तारीख में सिलेंडर हासिल करना भी किसी खिताब
पाने से कम नहीं है। गैस एजेंसी संचालक ग्राहक की पहचान निश्चित करने के नाम पर एक दो बार की बुकिंग को काले बाजार में बेच दे रहे हैं।मैंने देखा, सबकुछ उजड़ जाने के बावजूद सिलेंडर बचा लेने से उस महिला के चेहरे पर विश्व सुंदरी बनने जैसी खुशी उभर आई थी।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)
Leave a Reply