-राजेश बैरागी-
वकीलों का सबसे पसंदीदा विषय क्या है? क्या खुली अदालतों में अपने अपने मुवक्किलों के पक्ष में तार्किक और ओज पूर्ण बहस करना? क्या अपने मुवक्किलों को न्याय दिलाना या उन्हें अन्याय से बचाना? यदि यह प्रश्न टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में पूछा गया होता और जो जवाब मैं अगली पंक्तियों में देने जा रहा हूं,वैसा जवाब हॉट सीट पर बैठे किसी प्रतियोगी ने दिया होता तो वह इनाम जीतता अथवा नहीं परंतु उसके विरुद्ध वकीलों की देशव्यापी हड़ताल अवश्य हो जाती। और यह हड़ताल तब तक चलती जब तक स्वयं बिग बी साष्टांग दंडवत होकर नहीं कह देते कि देवियों सज्जनों यह जवाब सही होकर भी गलत है।दूर दूर से काम धंधा छोड़कर और किराया लगाकर न्याय की उम्मीद में अदालत पहुंचने वाले सज्जन से लेकर कपटी मुवक्किल को क्या मालूम कि वकीलों ने आज हड़ताल कर ली है।हड़ताल (Hartal) शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से संस्कृत के दो शब्दों ‘हट्ट’ (हाट/बाज़ार) और ‘ताल’ (ताला) के मेल से हुई है, जिसका तद्भव रूप हड़ताल बना। इसका अर्थ है- विरोध स्वरूप बाज़ारों पर ताला लगाना या सामूहिक रूप से काम बंद कर देना। क्या अदालतें बाजार हैं जिन्हें जब जी चाहे बंद किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने ‘हड़ताल’ जैसे वकीलों के पसंदीदा विषय पर सख्त रुख अपनाते हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद की निगरानी में गौतमबुद्धनगर जनपद की बार एसोसिएशन द्वारा पिछले दिनों की गई हड़तालों पर रिपोर्ट तलब कर ली है। बिना कारण हड़ताल किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।बार एसोसिएशन इस सख्ती पर मौन है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया के साथ यहां हुई कथित अभद्रता पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन बार पदाधिकारियों को तलब कर लिया था।उस कार्रवाई की गूंज अभी तक कानों में बची हुई है। परंतु वकील तो वकील ठहरे। सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा सख्ती के विरुद्ध एक अधिवक्ता ने आज ही बगावत करने की घोषणा कर दी तो उसके समर्थन में और भी कई अधिवक्ता कूद पड़े। बगावत का स्वरूप क्या होगा? बहुत से अधिवक्ता कल हड़ताल पर रहेंगे।(नेक दृष्टि)
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