-राजेश बैरागी-
कहा जाता है कि प्रजा वत्सल राजाओं की ख्याति का एक आधार बाजारों में और आम रास्तों पर छायादार वृक्ष तथा प्याऊ लगवाना भी होता था। लोकतंत्र में राजशाही नहीं रही परंतु आम नागरिकों की ऐसी आवश्यकताओं की जिम्मेदारी अधिकारियों पर है।गर्मी बढ़ने के साथ राज्य सरकार से लेकर स्थानीय प्रशासन तक तेज धूप में न निकलने, शीतल पेय पदार्थ पीते रहने जैसी सलाह देते हैं परन्तु आम नागरिकों के अधिक आवागमन वाले स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था कराने के बारे में कम ध्यान दिया जाता है। खासतौर पर बड़े शहरों और कस्बों में निशुल्क पेयजल मिलना असंभव सा हो गया है। हालांकि जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय निकाय आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए यथासंभव उपाय करते हैं। नोएडा प्राधिकरण ने शहर वासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर आधुनिक तकनीक (आर ओ)से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्योस्क स्थापित किए हैं। हालांकि नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में आगंतुकों को पेयजल मिलने की सार्वजनिक व्यवस्था का पूरी तरह अभाव है।गाजियाबाद नगर निगम में निगमायुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की पहल पर आगंतुकों को ताजा व मीठा नींबू पानी पिलाया जा रहा है। हाथरस के जिलाधिकारी अतुल वत्स ने कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों को ठंडा पेयजल पिलाने के लिए दस स्थानों पर मटके रखवाए हैं। मटकों को भरा रखने और साफ सफाई बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। ये सभी ऐसे प्रयास हैं जिनपर धन का खर्च मामूली होता है परंतु उनकी उपयोगिता बहुत होती है। अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय निकायों को भी इस प्रकार के जनोपयोगी कार्यों के प्रति सजग होना चाहिए।(नेक दृष्टि)
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