राजेश बैरागी।आम धारणा है कि नोएडा की धरती किसी को भी निर्धन नहीं रहने देती। यहां खाली हाथ आए लोगों की बड़ी बड़ी औद्योगिक इकाइयां शहर की शान में कसीदे पढ़ रही हैं तो कोई घोषित रोजगार न करने वाले लोग भी करोड़पति बन कर घूम रहे हैं। प्राधिकरण के अंदर और बाहर के लोगों ने मिलकर शहर में करोड़ों और अरबों की जायदाद खड़ी की है। इस शहर में भीख का व्यवसाय भी छोटा नहीं है।उनकी बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है।नोएडा प्राधिकरण अब उनके पुनर्वास के बारे में विचार करने लगा है। दो दिन पहले (मंगलवार को)शहर भ्रमण पर निकले प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ लोकेश एम ने अनुभव किया कि सेक्टर 18 और अट्टा मार्केट में भिखारियों की तादाद जरूरत से ज्यादा हो गई है। उन्होंने तत्काल मातहत अधिकारियों को भिखारियों की संख्या कम करने और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। हालांकि यह नहीं बताया गया है कि शहर की आबादी के अनुपात में कितने भिखारी होने चाहिएं।इन भिखारियों में ही न जाने कितने चोर उचक्के भी अपना धंधा कर रहे हैं, कौन जानता है।प्राधिकरण भिखारियों का पुनर्वास कैसे करेगा,यह अभी स्पष्ट नहीं है। परंतु एक बात स्पष्ट है कि यह काम आसान नहीं है। अमूमन कोई भिखारी अपने भीख मांगने के व्यवसाय को बदलने को तैयार नहीं होता है। यह शहर गवाह है कि सड़कों से रेहड़ियों को हटाने के उद्देश्य से फड़ आवंटन की योजना कभी की ध्वस्त हो चुकी है तो सेक्टर 122 में बहुमंजिला फ्लैट आवंटन के बाद सेक्टर 9 व सेक्टर 10 की झुग्गी बस्ती चल रहे अवैध व्यापार का विस्तार सड़कों पर और फैल गया है। क्या कभी नोएडा की सड़कों से रेहड़ी पटरी का सफाया हो सकता है? क्या सेक्टर 9-10 की झुग्गी बस्ती कभी हट सकती है? यदि इन प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया जा सकता तो भिखारियों के पुनर्वास का सपना देखना भी मूर्खता ही है
नोएडा में भिखारी और उनका पुनर्वास !








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