देश का मान बढ़ाने वाले के सम्मान में रोड जाम 

राजेश बैरागी।एक दौड़ते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर आधा घंटा जाम लगने के क्या मायने हैं? और यदि यह जाम किसी चैम्पियनशिप में जीत हासिल करने वाली किसी किशोरी के स्वघोषित सम्मान यात्रा के कारण लगाया गया हो और इस सम्मान यात्रा की रक्षा स्वयं पुलिस करे तो आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा? मैं अपने चश्मे को ठीक कराने के उद्देश्य से कल शाम दादरी (गौतमबुद्धनगर) पहुंचा तो ब्राजील में वुशु खेल प्रतियोगिता में विजयी होकर लौटी शिवानी प्रजापति की सम्मान यात्रा निकाली जा रही थी।उस बेटी ने अपने परिश्रम और खेल कौशल से देश का मान बढ़ाया,यह गर्व की बात है। एक खुली जीप में वह किशोरी खड़ी थी जो उसके साथ जीप में क्षमता से अधिक चढ़े लोगों के बीच बामुश्किल ही दिखाई दे रही थी। उसके आगे तेज आवाज में गाने गाता डीजे चल रहा था। उससे भी आगे एक तिरंगा लगे एक ट्रैक्टर पर स्टंट करते कुछ युवा चढ़े हुए थे।शक्ति प्रदर्शन से लेकर राष्ट्रभक्ति तक का माहौल था। इस जुलूस या सम्मान यात्रा को स्थानीय पुलिस की एक जीप एस्कॉर्ट कर रही थी जबकि कुछ पुलिसकर्मी सड़क पर पैदल चलकर शांति व्यवस्था में लगे हुए थे। इस जुलूस के कारण पहले जीटी रोड पर आधा घंटा से चालीस मिनट तक यातायात जाम हो गया। फिर रेलवे रोड पर भी लगभग इतने ही समय जाम का माहौल बना रहा। मैंने देखा कि गाजियाबाद से दादरी के बीच चलने वाली एक रोडवेज सिटी बस अपने गंतव्य पर मात्र पांच सौ मीटर दूर होने के बावजूद पहुंच नहीं पा रही थी। इसी प्रकार दिल्ली से उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जा रही रोडवेज बस अकारण अपने निर्धारित समय से आधा पौन घंटा लेट हो गई। अतिक्रमण से हमेशा घिरा रहने वाला रेलवे रोड भी इस जुलूस से कुछ देर के लिए पूरी तरह ठहर गया। क्या इस प्रकार के जुलूस से आम लोगों को कोई संदेश या प्रेरणा मिलती है? कुछ वर्षों पहले तक इस प्रकार देश का मान बढ़ाने वालों का किसी ऑडिटोरियम या स्टेडियम में किसी सामाजिक हस्ती की उपस्थिति में सम्मान किया जाता था। संभवतः अब यह शक्ति प्रदर्शन और लोगों को जबरदस्ती परेशान करने का सबब बन चुका है

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