_-राजेश बैरागी-_
नोएडा प्राधिकरण ने लगभग अस्सी हजार स्ट्रीट लाइट का आठ वर्षों से पीपीपी मॉडल पर प्रबंधन संभाल रहे टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को शहर विस्तार के साथ लगभग चालीस हजार और स्ट्रीट लाइटों के प्रबंधन की भी जिम्मेदारी अगले ढाई वर्षों के लिए सौंप दी है। उधर 2022 में शहर की सड़कों को रौशन रखने के लिए सात वर्ष का ठेका सूर्या रौशनी लिमिटेड को देकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पछता रहा है और शहर विस्तार के साथ बढ़ी स्ट्रीट लाइटों के प्रबंधन के लिए नये ठेकेदार नियुक्त करने की तैयारी चल रही है।नोएडा ग्रेटर नोएडा जैसे आधुनिक शहरों की जीवनरेखा समझी जाने वाली सड़कों को हर रात रौशन रखने के लिए प्राधिकरणों द्वारा विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। दोनों शहरों में दो सौ दो सौ किलोमीटर सड़कों का जाल है। अधिसूचित क्षेत्र के गांवों की गलियों को रौशन रखने की जिम्मेदारी भी प्राधिकरणों की है। नोएडा प्राधिकरण ने आठ वर्ष पहले शहर की लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर सड़कों पर लाइट जलाने के लिए टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को पीपीपी मॉडल पर जिम्मेदारी सौंपी थी।तब सर्वे के बाद उच्च बिजली खपत वाली सोडियम और मर्करी के स्थान पर 76600 एलईडी लाइटें लगाई गई थीं।उस समय 15900 किलोवाट कनेक्टिड लोड था जो एलईडी लाइट लगने से 6800 किलोवाट रह गया है। पीपीपी मॉडल के तहत बची हुई बिजली की कीमत का नब्बे प्रतिशत टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड लेता है और बदले में लाइट लगाने से लेकर उन्हें जलाए रखने की जिम्मेदारी उठाता है।हाल ही में नोएडा प्राधिकरण बोर्ड की 223 वीं बैठक में टाटा को शहर विस्तार के साथ बढ़ी सड़कों पर लगभग 32 हजार और स्ट्रीट लाइटें लगाने तथा उनके अनुरक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। यह जिम्मेदारी अगले ढाई वर्षों के लिए दी गई है। इस दौरान नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे के सेंट्रल वर्ज में 400 वाट क्षमता की 1250 लाइटें लगाई जाएंगी। वहीं कंपनी एक 2.4 मेगावाट सोलर स्टोरेज एनर्जी संयंत्र भी लगाएगा जिससे पीक आवर्स में एक्सप्रेस-वे की स्ट्रीट लाइट बिजली कटने पर भी जगमगाती रहें। प्राधिकरण के विद्युत यांत्रिकी महाप्रबंधक आरपी सिंह ने बताया कि यह संयंत्र 20 वर्ष के लिए लगाया जाएगा।इसके साथ ही दो ईवी चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे।उधर 2022 में सूर्या रौशनी लिमिटेड को शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सौंप कर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पछता रहा है। यह कंपनी सड़कों निर्बाध रौशन रखने में विफल रही है। चालीस रुपए प्रति लाइट प्रति माह की दर से अनुरक्षण का ठेका लेने वाली इस कंपनी के प्रति निवासियों की शिकायतें खूब आती हैं। लाइटें खराब रहने से दुर्घटनाओं के साथ असामाजिक क्रियाकलाप भी बढ़ जाते हैं। प्राधिकरण अधिकारियों का मानना है कि सूर्या रौशनी लिमिटेड के साथ किया गया अनुबंध बहुत समझदारी भरा नहीं था।इसीलिए शहर के विस्तार के साथ बढ़ी सड़कों पर लाइट का प्रबंधन करने के लिए नये संविदाकार तलाशे जा रहे हैं।अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा सिंह ने बताया कि नये संविदाकार से शहर की स्ट्रीट लाइट हमेशा दुरुस्त रखने का करार किया जाएगा।(नेक दृष्टि)
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