शांति देवी ने अदालत से कहा,-मैं जीवित हूं

_-राजेश बैरागी-_

यह कहानी फिल्मी नहीं है बल्कि एक ऐसी अभागिन मां की है जिसे उसकी विधवा बहू ने लगभग ढाई करोड़ रुपए का एक भूखंड हड़पने के लिए अदालत के समक्ष मृत बता दिया। शांति देवी उरई(जालौन उत्तर प्रदेश) की रहने वाली हैं। उनके तीन पुत्र और एक पुत्री थे। उनमें से एक पुत्र अरुण की 30 नवंबर 2022 को असमय मृत्यु हो गई। अरुण ने ग्रेटर नोएडा के ज्यू-3 सेक्टर में 120 वर्गमीटर का एक भूखंड खरीद रखा था। उसकी मृत्यु के पश्चात पत्नी प्रीति ने उक्त भूखंड को अपने व अपने दो नाबालिग बच्चों के नाम यह बताकर हस्तांतरित करा लिया कि केवल वही तीनों अरुण के विधिक उत्तराधिकारी हैं। इसके बाद उसने जिला जज गौतमबुद्धनगर की अदालत में एक वाद दायर कर नाबालिग बच्चों की संरक्षिका होने के नाते उक्त भूखंड बेचने का अधिकार देने की मांग की। अदालत के समक्ष उसने अपनी सास यानी शांति देवी को मृत बताते हुए उसकी मृत्यु का पानीपत हरियाणा से जारी प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया। अभी यह वाद चल ही रहा था कि शांति देवी स्वयं अदालत के सम्मुख उपस्थित हो गई। उन्होंने अदालत और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बताया कि वह जीवित हैं और प्रीति द्वारा भूखंड हड़पने के लिए उन्हें झूठा मार दिया गया है। प्रीति ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत वाद पत्र में बताया है कि उसे अपने दोनों नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण तथा शिक्षा आदि के लिए भूखंड को बेचने की आवश्यकता है। शांति देवी ने अदालत को बताया कि उनकी पौत्री जो 17 वर्ष की है अपने चाचा के साथ रहकर मुंबई में पढ़ रही है, प्रीति ने अपने पति के जीपीएफ और एलआईसी के 70 लाख रुपए हासिल कर लिए हैं और सबसे दिलचस्प बात यह है कि प्रीति ने दूसरी शादी कर ली है। उन्होंने अदालत से उन्हें अपने पोते पोती की संरक्षिका घोषित करने के साथ उन्हें उनके स्वर्गीय पुत्र अरुण के उक्त भूखंड में कानूनन 25 प्रतिशत की हिस्सेदार घोषित करने की भी प्रार्थना की है। जिला जज ने शांति देवी द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर संज्ञान लेते हुए प्रीति को सफाई देने का आदेश दिया है।अपुष्ट सूत्र बताते हैं कि सच्चाई सामने आने और झूठ पकड़े जाने के भय से प्रीति मुकदमा छोड़ कर भाग खड़ी हुई है। हालांकि इस प्रकार का यह कोई नया मामला नहीं है।धन संपत्ति के लोभ में सगे संबंधियों को मृत बताने के नित नए मामले सामने आते रहते हैं। यहां प्रश्न केवल इतना भर है कि अदालत के समक्ष झूठा दावा करने से भी लोगों को कोई परहेज नहीं होता है और पानीपत समेत देशभर के सरकारी कार्यालयों में झूठे प्रमाण पत्र जारी होने से रोकने का कोई तंत्र विकसित नहीं हो पाया है।(नेक दृष्टि)

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