ग्रेटर नोएडा साइट-4 में *रामलीला रामलीला रामलीला रे रामलीला

_-राजेश बैरागी-_

कभी पंचम दा (प्रसिद्ध फिल्म संगीत निर्देशक व गायकआर डी बर्मन) की गाई यह पंक्ति आज भी सजीव हो उठती है जब हर वर्ष क्वार माह में जगह जगह रामलीलाओं का मंचन होता है।आज मैंने वर्षों बाद परिवार और खासतौर पर 9 महीने की पौत्री के साथ रामलीला मेले का आनंद लिया। ग्रेटर नोएडा के साइट-4 में हर वर्ष श्री रामलीला समिति द्वारा आयोजित होने वाले रामलीला मेले में लगभग वह सभी कुछ है जिसे हमने बचपन में देखा या धनाभाव के कारण देखने की हसरत शेष रह जाती थी। मसलन मोम की भांति पिघलने वाली लड़की का खेल,काला जादू, मौत का कुंआ, खेल खिलौने और घरेलू उपयोग के सामान की दुकानें, बच्चों और बड़ों के झूले,चाट पकौड़ी की दुकानें और बंदूक उठाकर गुब्बारों पर निशाना लगाने की स्टाल तथा सामने सजे सामानों को रिंग फेंककर अपना बनाने का लालच देने वाली दुकानें। एक दुकान पर हर सामान केवल पांच रुपए में बेचा जा रहा था तो एक और दुकान पर हर सामान पचास रुपए में। हालांकि अब धनाभाव नहीं है परंतु वैसी हसरत नहीं बची है। फिर भी बचपन की याद तो ताजा हो ही जाती है।मेले में बेचे जाने वाले सामान की गारंटी कोई मायने नहीं रखती। सिकंदराबाद (बुलंदशहर) के प्रसिद्ध हलवाई जयंती कैटरर्स का भी खान-पान का स्टाल है। मैदान के आधे हिस्से में रामलीला मंचन होता है।मंच तीन मंजिला है जिसपर दिव्य और अलौकिक दृश्यों यथा यदि देवताओं को किसी दृश्य में पुष्प वर्षा करनी हो तो वह दूसरी या तीसरी मंजिल से ऐसा कर सकते हैं। मंचन के दौरान ध्वनि एवं प्रकाश की भी सटीक व्यवस्था की गई है।यह मैदान एक प्रकार से ग्रेटर नोएडा के पूर्वी हिस्से के लगभग बीचोंबीच है जिससे यहां पहुंचने में लोगों को कोई समस्या नहीं है। मैंने देखा कि इंटरनेट और एआई के इस आधुनिक समय में भी बच्चों के झूले, खान-पान और घरेलू व सजावटी सामानों की दुकानों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। हालांकि बड़े झूलों और खेल तमाशों को लोगों का थोड़ा इंतजार करना पड़ रहा था। एक 78 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्नल किसी प्रवचन कर्ता के रिकॉर्डेड प्रवचनों को टीवी और हेडफोन के माध्यम से मेले में आ रहे लोगों को सुनने के लिए आग्रह कर रहे हैं। संभवतः इस प्रकार वे उस प्रवचन कर्ता या अपनी संस्था से लोगों को जोड़ने के लिए ऐसा कर रहे हों। आज श्रीराम ने अहिल्या उद्धार किया। इस रामलीला मेले में सभी कुछ ठीक है। आयोजन समिति के सदस्य सुरक्षा और व्यवस्था की देखभाल के लिए निरंतर इधर से उधर मैदान में घूम रहे थे। एक कमी भी दिखाई दी।पूरे मैदान में कहीं भी हाथ धोने तक के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यदि पानी चाहिए तो खरीदना पड़ेगा। अन्य रामलीला मेलों में आयोजन समितियां आमतौर पर जगह जगह पेयजल की व्यवस्था करती हैं। यहां भी ऐसा हो तो क्या बुरा है।(नेक दृष्टि)

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