_-राजेश बैरागी-_
मां पीतांबरा के दर्शन से वापस लौटते समय झांसी जिला मुख्यालय और मंडल आयुक्त कार्यालय का भ्रमण किया। जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट)का परिसर काफी बड़ा है परंतु भवन पुराने तरीके का है। वहां से निकलने के बाद हमारी अच्छी चाय पीने की इच्छा को पूरी करने के लिए हमारा गाड़ी चालक हमें शहर के बीचोंबीच एक ऐसी दुकान पर ले गया जो सिंचाई विभाग कार्यालय के बराबर में सड़क किनारे एक टपरी जैसी थी। वहां दुकान जैसा कोई ढांचा तो नहीं था परंतु चाय के कद्रदानों की भीड़ लगी थी। दुकानदार का व्यवहार बहुत ही अपनत्व से भरा था।ऐसी दुकानों पर चाय पीने के साथ राजनीति पर चर्चा एक आम बात है। दक्षिण का मुझे इल्म नहीं, यदि उत्तर भारत में राजनीति की नब्ज जाननी हो तो नुक्कड़ और चौराहों पर चाय की दुकान से अच्छी कोई जगह नहीं है। यहां रिक्शा चालक से लेकर दफ्तरों के किरानी तक सब मिलेंगे और अपनी अपनी राजनीतिक निष्ठाओं के साथ। झांसी में कुल चार विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें से मऊरानीपुर में राजग के अपना दल से विधायक रश्मि आर्या हैं और शेष तीन में भाजपा के विधायक तथा सांसद भी भाजपा के ही हैं। एक प्रकार से झांसी जिले पर भाजपा और उसके सहयोगी दल का राजनीतिक कब्जा है।2027 के विधानसभा चुनावों के लिए झांसी में भाजपा का भविष्य क्या होगा?चाय की चुस्कियों के बीच लोग समाजवादी पार्टी के जनाधार की बात भी कर रहे थे परंतु दबी जुबान। एक युवक ने सपा को मुख्य मुकाबले में बताते हुए अपनी बात पर पूरा जोर भी दिया। हालांकि अधिकांश लोग भाजपा से पूरी तरह खुश न होने के बावजूद उसका विकल्प न होने पर सहमत थे। झांसी बुंदेलखंड का सबसे बड़ा शहर है। बुंदेलखंड से रोजगार के लिए खूब पलायन हुआ है। अभी भी आसपास के अधिकांश युवा टैक्सी, ट्रक चलाने जैसे धंधे में हैं। औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई है।लोग इस प्राधिकरण से बहुत आशान्वित भी हैं,बस इसके शुरू होने की प्रतीक्षा है। गाड़ी चालक ने हमें वहां से वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन छोड़ा तो हमने वंदे भारत रेलगाड़ी फिर से पकड़ ली। यात्रा का अगला पड़ाव आगरा था।अगली पोस्ट में आगरा मिलेंगे।(नेक दृष्टि)
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