
-राजेश बैरागी-
आगामी 17 अप्रैल को मैं यानी नोएडा प्राधिकरण अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर लूंगा। अभी मैं सेक्टर-6 स्थित उस ऐतिहासिक इमारत में संचालित हूं जिसका निर्माण 1980 में हुआ था।इससे पहले 1976 में गठन होने के पश्चात मैं अस्थाई रूप से पहले क्नॉट प्लेस और फिर चिल्ला रेग्यूलेटर पर चला।कारण इस क्षेत्र का अति पिछड़ा होना था। दिल्ली से सटे होने के बावजूद यह क्षेत्र बेलगाम हिंडन और यमुना नदियों के बीच एक विशाल कटोरे जैसा था जिसमें साल दो साल में इन नदियों में आने वाली बाढ़ का पानी भर जाया करता था। संभवतः ऐसा आगे भी होता रहता परंतु 1978 में आयी भयंकर बाढ़ ने नीति निर्माताओं को सर्वप्रथम इन दोनों नदियों को बांध बनाकर नियंत्रित करने के लिए विवश कर दिया। फिर सेक्टर -6 में प्राधिकरण के लिए स्थाई कार्यालय भवन के तौर पर इस भवन का निर्माण किया गया। शुरुआत में सामने से दिखाई देने वाली दो मंजिला इमारत ही बनाई गई थी। फिर इसके दाहिनी ओर तथा पीछे टिन शेड में अभियांत्रिकी विभाग तथा अन्य विभागों के कार्यालय बनाए गए।टिन शेड में कतार जैसी आकृति में बनाए गए एनेक्सी भवन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मौहम्मद उस्मान आरिफ ने किया था जिसका प्रमाण वह शिलापट्ट है जो आज भी मुख्य भवन के बगल में लगा है।एनेक्सी (Annexe/Annex) का हिंदी में मुख्य अर्थ उपभवन, संलग्न भवन, या अतिरिक्त इमारत होता है।पिछले छियालीस वर्षों में इस भवन में मेरे खैरख्वाह अनेक आईएएस अधिकारियों ने बैठकर नोएडा जैसे विख्यात नगर को मूर्त रूप दिया। इनमें से कम से कम दो दर्जन वह आईएएस अधिकारी भी रहे हैं जो अध्यक्ष सह मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनकर आए।लगभग दो दशक से नोएडा प्राधिकरण में मुखिया के तौर पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है और प्राधिकरण अध्यक्ष का दायित्व औद्योगिक विकास आयुक्त से लेकर मुख्य सचिव तक को दिया जाता है। छियालीस वर्षों तक उत्तर प्रदेश और देश के पहले एकीकृत औद्योगिक नगर को स्वरूप देने वाली यह इमारत आगामी 17 अप्रैल से बेगानी होनी शुरू हो जाएगी जब एक एक करके प्राधिकरण के सभी अधिकारियों और विभागों के कार्यालय सेक्टर 96 में उद्घाटन के लिए तैयार नये कार्यालय भवन में स्थानांतरित होने शुरू हो जाएंगे। इस आगामी अनुभव की चर्चा मैं अगली पोस्ट में करूंगा…….।(नेक दृष्टि
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