
-राजेश बैरागी-
नोएडा के सेक्टर 30 स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के पीछे पार्क में स्थापित किए जा रहे मोबाइल टावर से होने वाले स्वास्थ्य और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर सेक्टर वासियों में गहरा रौष उत्पन्न हो गया है। यह टावर स्कूल, मंदिर, अस्पताल और घनी आबादी के बीच लगाया जा रहा है।
नोएडा जैसे घनी आबादी वाले शहर में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराने के लिए टावर लगाने के स्थान को लेकर विवाद खड़े होते रहते हैं।आम मान्यता है कि मोबाइल टावर से निकलने वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण (EMF radiation) से मुख्य रूप से सिरदर्द, नींद न आना, थकान, और एकाग्रता में कमी जैसी स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जुड़ी हैं। हालाँकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय नियमों के अनुसार, ये किरणें नॉन-आयनाइजिंग होती हैं और कैंसर का पुख्ता सबूत नहीं है, फिर भी लंबे समय तक उच्च रेडिएशन के संपर्क में रहने से अनिद्रा और मानसिक तनाव जैसे दीर्घकालिक प्रभाव हो सकते हैं। ताजा मामला सेक्टर 30 में स्थापित किए जा रहे मोबाइल टावर का है। यह टावर डीपीएस स्कूल के पीछे ग्रीन बेल्ट में लगाया जा रहा है। इस ग्रीन बेल्ट से सटा स्कूल तो है ही, मंदिर, घनी आबादी और अस्पताल भी है। सेक्टर 30 के निवासियों को चिंता है कि इस टावर के संचालित होने से स्कूल के बच्चों, निवासियों और रोगियों को स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।साथ ही पर्यावरणीय समस्या भी उत्पन्न होंगी। सेक्टर 30 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष पीयूष सलवान तथा समाजसेवी अरविंद शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे स्थानों पर मोबाइल टावर लगाने से पहले आसपास की परिस्थितियों का आकलन किया जाना आवश्यक है। उधर प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट में मोबाइल टावर लगाया जा सकता है।(नेक दृष्टि)
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