राजेश बैरागी।हालांकि नोएडा प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह एक अस्थाई रोक है, शीघ्र ही फिर ऐसे ही बिल बनेंगे और प्राधिकरण चलता जाएगा। दरअसल बीते सप्ताह नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ लोकेश एम ने अचानक इंजीनियरों और अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के उन अधिकारों पर रोक लगा दी है जिनके तहत ये लोग लाखों रुपए के वर्क ऑर्डर और करोड़ों रुपए के टेंडर मनमर्जी से जारी कर रहे थे। बताया गया है कि सबसे अधिक गड़बड़झाला प्राधिकरण के जल सीवर और विद्युत अनुरक्षण विभागों में पाया गया है। ये दोनों विभाग महाप्रबंधक राघवेन्द्र प्रताप सिंह की सदारत में चलते हैं। पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार ने निर्माण तथा अनुरक्षण के ठेकों में पारदर्शिता लाने के लिए ई टेंडर की व्यवस्था लागू की थी। इससे तत्काल और अग्रिम तौर पर कराये जाने वाले कार्यों के ठप्प होने की समस्या बताकर कुछ लाख रुपए तक के आपात कार्यों के लिए वर्क ऑर्डर की व्यवस्था फिर से लागू कराई गई। इस व्यवस्था की आड़ में ताबड़तोड़ बिल फाड़े जाने लगे। बताया गया है कि एक से पांच लाख रुपए तक के वर्क ऑर्डर वरिष्ठ प्रबंधक/उपमहाप्रबंधक जारी कर देते थे जबकि दो करोड़ रुपए के टेंडर की अनुमति अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों से ली जाती थी। मुख्य कार्यपालक और अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों को पत्रावली न भेजने के लिए बड़े कार्यों को जानबूझकर छोटे छोटे हिस्सों में कराया जाता था। कुछ समय पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने ऐसे कार्यों की जानकारी तलब की थी परंतु उन्हें वर्क ऑर्डर के खेल में लगे अभियंताओं ने कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। सबसे ज्यादा खेल जल सीवर व विद्युत अनुरक्षण विभागों में किया जा रहा था। प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार शीघ्र ही कुछ अभियंताओं को पद से हटाने तथा निलंबन की कार्रवाई हो सकती है। क्रमशः










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