_-राजेश बैरागी-_
क्या औद्योगिक गतिविधि बढ़ने के साथ जनपद गौतमबुद्धनगर में एक बार फिर नब्बे के दशक की पुनरावृत्ति होने लगी है?तब नोएडा तेजी से बस रहा था और ग्रेटर नोएडा में इक्का-दुक्का किंतु डीसीएम, एस्कॉर्ट जैसी महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो रही थीं कि कुछ स्थानीय लोगों ने विधायक के नाम पर दबंगई फैलानी शुरू कर दी।आज यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में औद्योगिक इकाइ लगा रही एक महिला ने फोन कर सुरक्षा की मांग की।वह अपनी औद्योगिक इकाइ में निर्माण से पहले मिट्टी का भराव करा रही है। इसके लिए उसने एक स्थानीय व्यक्ति को मिट्टी भराव का ठेका दिया। महिला उद्यमी का कहना है कि बिना कॉम्पैक्ट किए ठेकेदार पूरे पैसे मांग रहा है। इसके लिए वह विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह का आदमी होने की धमकी दे रहा है। महिला उद्यमी का कहना है कि उसने पुलिस से भी शिकायत की है परंतु उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।ऐसा ही नब्बे के दशक में दादरी से लेकर नोएडा तक हो रहा था। विधायक का आदमी होने का दावा करने वाले लोग औद्योगिक इकाइयों में आतंक स्थापित कर रहे थे। उनके विरुद्ध पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती थी। एक बार लगने लगा था कि सब कुछ उजड़ जायेगा।1991 में भाजपा की कल्याण सिंह सरकार आने के बाद शांति स्थापित हुई।अब तो भाजपा की योगी सरकार है और माफियाओं को मिट्टी में मिलाने का खुला ऐलान। महिला उद्यमी मिट्टी माफिया से आतंकित हैं। बताया गया है कि भराव के लिए मिट्टी प्राधिकरण की अर्जित भूमि से अवैध खनन की गई है।(नेक दृष्टि)
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