
-राजेश बैरागी-
क्या आपने कभी देखा है कि दूसरों के रास्ते में कांटे बिछाने वाले खुद उन कांटों में उलझ गए हों? ग्रेटर नोएडा के परी चौक जैसी सर्वश्रेष्ठ लोकेशन पर स्थित जे पी ग्रीन्स में एक संपत्ति को बेचने के लिए जे पी एसोसिएट्स के मालिक मनोज गौड़ ने खुद अदालत से उसके उस आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई है जो उन्हीं की मेंटेनेंस कंपनी ने अपनी अवैध वसूली को जारी रखने के लिए हासिल किया था।
परी चौक पर स्थित जे पी ग्रीन्स ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर 19, सेक्टर 25, सेक्टर 26 व सेक्टर 31 के चार भूखंडों की लगभग साढ़े चार सौ एकड़ भूमि पर बसी एक ऐसी सोसायटी है जिसमें गोल्फ कोर्स और तमाम सुविधाओं सहित लगभग 1700 आवासीय फ्लैट और विला भी हैं।इसे एक छोटा सा अत्याधुनिक शहर भी कहा जा सकता है। फिलहाल यह छोटा सा अत्याधुनिक शहर जे पी एसोसिएट्स के कथित दिवालिया हो जाने के चलते एनसीएलटी प्रयागराज के आदेश से आईआरपी(अंतरिम समाधान पेशेवर) के नियंत्रण में है परंतु रखरखाव संबंधी नियंत्रण अभी भी जे पी एसोसिएट्स के हाथों में ही है। यह कंपनी यहां की संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के लिए एनोसी जारी करने के लिए दो सौ रुपए प्रति वर्ग फुट तथा दो लाख रुपए क्लब सदस्यता के नाम पर अवैध वसूली करती है।इस कंपनी ने गत 20 अगस्त 2025 को गौतमबुद्धनगर सिविल जज(सीनियर डिवीजन) की अदालत में एक मुकदमा दायर कर 17 अक्टूबर 2025 को यहां की संपत्तियों की खरीद-फरोख्त को उसके अनापत्ति प्रमाण-पत्र के बगैर ट्रांसफर करने के ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकार पर यथास्थिति का आदेश हासिल कर लिया। अदालत के इस आदेश का असर यह हुआ कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अदालत के अगले आदेश तक जे पी ग्रीन्स की संपत्तियों के ट्रांसफर पर रोक लगा रखी है। बताया गया है कि अब लगभग आठ सौ वर्गमीटर की किसी संपत्ति को बेचने के लिए भी प्राधिकरण ने ट्रांसफर मेमोरेंडम जारी करने से इंकार कर दिया तो जे पी एसोसिएट्स के मालिक मनोज गौड़ को भी अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ गया है। उन्होंने अदालत से जे पी एसोसिएट्स द्वारा दायर मुकदमे में ही उपस्थित होकर अदालत को बताया कि उनके पास जे पी एसोसिएट्स की अनापत्ति है इसलिए उनके मामले में प्राधिकरण को टी एम जारी करने का आदेश दिया जाए।दो दिन पहले हुई सुनवाई में अदालत ने मनोज गौड़ के अधिवक्ताओं की दलील पर अपने यथास्थिति के आदेश में सीमित संशोधन करते हुए ऐसे मामलों में प्राधिकरण को टी एम जारी करने की छूट प्रदान कर दी जिनमें जे पी एसोसिएट्स की अनापत्ति है परंतु स्टार कोर्ट एओए अध्यक्ष डॉ रूपेश वर्मा व उनके अधिवक्ताओं के कड़ा विरोध करने पर अदालत ने संशोधित आदेश को प्राधिकरण पर बाध्यकारी न होने का एक और आदेश जारी कर दिया।अगली सुनवाई आगामी सोमवार को होगी। यह भी बताया जा रहा है कि मनोज गौड़ का एक संपत्ति को ट्रांसफर कराने के लिए अदालत आना वास्तव में अदालत के यथास्थिति के आदेश को अपनी कंपनी के पक्ष में संशोधित कराने का ही प्रयास है जिसमें एक बार तो सफलता मिल भी गई थी परंतु स्टार कोर्ट एओए के विरोध के चलते फिलहाल उनकी इस योजना पर पानी फिर गया है।(नेक दृष्टि)(
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