(यह व्यंग्य बिल्कुल नहीं है)

प्राधिकरण में कॉकरोच की कुटेशन 

राजेश बैरागी।प्राधिकरण कैसे काम करते हैं? जनपद गौतमबुद्धनगर में कार्यरत तीन में से एक औद्योगिक विकास प्राधिकरण में एक अधिकारी के कक्ष में कॉकरोच दिखाई देने से हड़कंप मचा हुआ था। दरअसल यह माना जाता है कि धरती पर जितने भी जीव हैं उनमें से सबसे मजबूत चमड़ी इसी जीव की है, अधिकारियों को छोड़कर।दो एक जैसी चमड़ी के जीव एक साथ कैसे रह सकते हैं लिहाजा कॉकरोचों को निपटाने की जिम्मेदारी अभियांत्रिकी विभाग को सौंपी गई। हमारे देश में आम नागरिकों की अधिकांश आपदाओं मसलन आग लगने, घर में सांप निकल आने,सांड के बिगड़ जाने जैसी आपदाओं से निपटने की जैसी जिम्मेदारी पुलिस की है वैसे ही प्राधिकरणों में ऐसे वैसे कैसे भी कार्यों के लिए अभियांत्रिकी विभाग को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। अन्यथा कॉकरोचों को निपटाने में इंजीनियरिंग का क्या काम है। बहरहाल,अधिकारी के कक्ष से कॉकरोचों को निकालने की जिम्मेदारी जिस वर्क सर्किल प्रभारी को सौंपी गई, उसका स्वभाव गैरजिम्मेदाराना बताया गया है। अधिकारी के दोबारा शिकायत करने पर अभियांत्रिकी विभाग प्रमुख ने कॉकरोच हटाओ अभियान की प्रगति रिपोर्ट तलब की तो एक मुलाजिम ने बताया कि कॉकरोचों के समूल नाश की योजना तैयार कर ली गई है और इस योजना को साकार करने के लिए शीघ्र ही टेंडर जारी किया जाएगा। विभाग प्रमुख इस प्रगति से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने संबंधित वर्क सर्किल प्रभारी को बुलावा भेजा तो उनके नायब ने आकर बताया कि कॉकरोचों के सफाए के लिए वर्क ऑर्डर बनाया जा रहा है। शीघ्र ही इस समस्या से पार पा लिया जाएगा। विभाग प्रमुख की बैचेनी बढ़ती जा रही थी। उनके बुलावे पर इस बार स्वयं वर्क सर्किल प्रभारी को सशरीर उपस्थित होना पड़ा। उसने बताया कि समस्या की गंभीरता को देखते हुए आपात स्थिति में परंपरागत रूप से कुटेशन आमंत्रित करने का प्रावधान है। तीन योग्य ठेकेदारों को प्रतियोगी दरों पर कॉकरोच मारने के लिए कुटेशन पेश करने को कहा गया है। प्रक्रिया पूरी होते ही कॉकरोचों को अधिकारी के कक्ष से खदेड़ने का व्यापक अभियान चलाया जाएगा। विभाग प्रमुख अब तक आपा खो चुके थे। उन्होंने लाल लाल नेत्रों से देखते हुए उससे कहा,-अबे पास के किसी डिपार्टमेंटल स्टोर से लाल हिट मंगा और अधिकारी के कक्ष में छिड़क दे।’ मैं मन में विचार करने लगा कि यदि कॉकरोचों को मारने के लिए टेंडर जारी होता तो कितने करोड़ रुपए का होता और यदि वर्क ऑर्डर या कुटेशन जारी होती तो कितने लाख रुपए की होती। विभाग प्रमुख की सूझबूझ से कॉकरोच अपने अंतिम संस्कार पर आम जनता के करोड़ों रुपए खर्च होने के पाप से बच गए अन्यथा ऊपर जाकर क्या मुंह दिखाते।(

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