
_-राजेश बैरागी-_
उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के नोएडा के ट्विन टावरों को गिराने के आदेश की याद ताजा कर दी है।कल 27 अक्टूबर को न्यायालय ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा तीन बार स्वीकृत कंपाउंडिंग नक्शे के आधार पर अवैध रूप से निर्मित एसवीपी बिल्डर इंडिया लिमिटेड के गुलमोहर ग्रीन रेजीडेंसियल प्रोजेक्ट के दो टावरों क्रमशः 27 व 28 को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने तथा टावर संख्या 16,17,18, व 19 के 9वें व 10वें फ्लोर को दो महीने में तोड़ने का आदेश दिया है। साथ ही बिल्डर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, पहले दर्ज एफआईआर में अंतिम रिपोर्ट लगाने वाले जांच अधिकारी को निलंबित करने तथा जीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है।विकास प्राधिकरण किस प्रकार बिल्डरों के हाथों में खेलते हैं, यह मामला इसका जीता जागता उदाहरण है।उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायधीश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने यह निर्णय रिट संख्या 21821/2015 व रिट संख्या 68187/2015 में सुनवाई करने के बाद सुनाया।ये रिट गुलमोहर ग्रीन्स रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन तथा एसोसिएशन सदस्य सुरेश चन्द व अन्य द्वारा दायर की गई थीं। यह मामला एक साझेदार फर्म एसवीपी बिल्डर इंडिया लिमिटेड द्वारा गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस के निकट गांव करेहड़ा की भूमि पर निर्मित बहुमंजिला आवासीय योजना से संबंधित है। बिल्डर ने यहां 2006 में खसरा नंबर 9955 से 960 व 1010,1011,1014,1015, व 1017 से 1051 की भूमि पर आवासीय योजना का नक्शा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से स्वीकृत कराया था। हिंडन एयरबेस के अधिकारियों द्वारा उक्त भूमि पर स्वामित्व का दावा करने पर यह नक्शा 2010 में निरस्त हो गया। परंतु बिल्डर और प्राधिकरण की जुगलबंदी से 2011 में रिवाइज्ड नक्शा स्वीकृत होने के साथ पहले 34 टावर में 904 फ्लैट बनाने के स्थान पर 1094 फ्लैट बनाने की अनुमति दे दी गई। बिल्डर की भूख बढ़ती रही और जीडीए 2024 तक तीन बार कंपाउंडिंग नक्शा पास करता गया।ऐसा किया नहीं जा सकता था परंतु किया गया। बिल्डर ने योजना का कॉमन एरिया भी 85 लोगों को बेच खाया। अब उच्च न्यायालय ने इस मामले में टावर संख्या 27 व 28 को पूरी तरह जमींदोज करने तथा चार टावरों क्रमशः 16,17,18,19 के दो दो फ्लोर तोड़ने, प्रमोटर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और अपर पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी को जांच करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने जीडीए को याचिकाकर्ताओं को 50-50 हजार रुपए हर्जाना तथा प्रमोटर को 25 लाख रुपए रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के खाते में जमा कराने का भी आदेश दिया है।हालांकि विकास प्राधिकरणों और किसी बिल्डर के बीच इस प्रकार की जुगलबंदी का यह कोई नया मामला नहीं है। नोएडा में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुपरटेक बिल्डर के ट्विन टावरों को बम लगाकर उड़ाया गया था। सेक्टर 119 की अरन्या सोसायटी, सेक्टर 73 की अन्थूरियम सोसायटियों में प्राधिकरण के नियोजन विभाग की मिलीभगत से स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण के विरुद्ध वहां के निवासी विभिन्न मोर्चों पर लड़ रहे हैं। नोएडा प्राधिकरण का नियोजन विभाग की महाप्रबंधक मीना भार्गव के विरुद्ध यहां से लेकर लखनऊ तक शिकायतों का ढेर लगा हुआ है।कई मामलों में जांच भी चल रही है परंतु परिणाम शून्य है।(नेक दृष्टि)
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