_-राजेश बैरागी-_
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के लगभग साढ़े चार हजार उन किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर मिलने का रास्ता साफ हो गया जिनकी जमीन 2002 से 2013 के बीच अधिग्रहित की गई थी। इस संबंध में प्राधिकरण द्वारा मांगे गए मार्गदर्शन के जवाब में शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इन किसानों को यह अतिरिक्त मुआवजा देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।उल्लेखनीय है कि 2011 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा गजराज सिंह व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य मामले में 39 गांवों के किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड तथा 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस आदेश को 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा परंतु इन गांवों के न्यायालय नहीं गये किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने पर स्थिति अस्पष्ट रही जबकि ऐसे किसानों को भूखंड न देने का निर्णय पहले ही ले लिया गया था। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार से मार्गदर्शन मांगा था। किसानों के पक्ष में स्थानीय विधायक, सांसद तथा किसान संगठन भी आवाज उठा रहे थे।आज शासन से प्राप्त अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इस निर्णय से लगभग साढ़े चार हजार किसानों को प्राधिकरण द्वारा अतिरिक्त मुआवजे के तौर पर लगभग पांच सौ करोड़ रुपए वितरित किए जाएंगे। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी भी इस संबंध में लगातार शासन स्तर पर प्रयास कर रहे थे।(नेक दृष्टि)
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