राजेश बैरागी।गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा तुलसी निकेतन के जर्जर हो चुके 2292 फ्लैट और 60 दुकानों के पुनर्विकास की योजना शीघ्र ही अमल में लाई जा सकती है।प्राधिकरण उपाध्यक्ष अतुल वत्स की अध्यक्षता में आज शुक्रवार को तुलसी निकेतन योजना के भवनों के री-डवलपमेंट योजना की दिशा में एनबीसीसी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की गई। बैठक के दौरान एनबीसीसी के पदाधिकारियों के द्वारा योजना का री डवलपमेंट प्लान का प्रस्तुत किया गया। एनबीसीसी के पदाधिकारियों के द्वारा अवगत कराया गया कि योजना में री डवलपमेंट का कार्य दो चरणों में किया जाएगा जिसकी अगले आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंपी जाएगी। द्वितीय चरण में संपूर्ण डीपीआर पेश करते हुए कार्य को आगे बढ़ाया जायेगा। प्री feasibility स्टडी के रिपोर्ट के बाद यदि एनबीसीसी से एमओयू के शर्तो में यदि किसी तरह के बदलाव की संभावना होती है तो संशोधन करते हुए कार्य को आगे बढाया जाएगा। बैठक के दौरान प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने कहा कि तुलसी निकेतन योजना के भवनों के री डवलपमेंट योजना का उद्देश्य किसी तरह की आय हासिल करना नहीं हैै, ना ही प्राधिकरण दूर तक इस पक्ष में है कि योजना के भवनों में रह रहे किसी परिवार को बेघर किया जाए।यह परियोजना माननीय प्रधानमंत्री जी तथा माननीय मुख्यमंत्री जी के विजन ‘आपकी योजना का लाभ अंतिम पायदान पर उपस्थित लोगों तक पहुँचनी चाहिए’ पर आधारित है। इस योजना में 1990 में बसाई गई इस कॉलोनी के 2292 फ्लैट और 60 दुकानें हैं, जहां करीब 20 हजार लोग रहते हैं।प्राधिकरण द्वारा कराए गए सर्वे में इन मकानों को रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है। अब जीडीए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर निजी विकासकर्ताओं के साथ मिलकर 16 एकड़ क्षेत्र में नई बहुमंजिला इमारतें बना कर लोगों रहने लायक आवास मुहैया करायेगा। इस योजना में 2004 ईडब्ल्यूएस और 288 एलआईजी मकान शामिल थे, जिन्हें अब आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्विकसित किया जाएगा
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण: तुलसी निकेतन के लगभग ढाई हजार भवनों के पुनर्विकास पर जल्द हो सकता है फैसला











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