_-राजेश बैरागी-_
मेरी इस पोस्ट में गड्ढा मुक्त सड़कें कोई मुख्य किरदार नहीं हैं परन्तु कुछ अवसरों पर यह किरदार सड़क मुक्त गड्ढों के रूप में उपस्थित अवश्य होगा।बीते कल 12 अक्टूबर को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव एवं प्रभारी मुख्य अभियंता तथा अभियंताओं की टीम द्वारा NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, डिप्टी मैनेजर एवं संबंधित अभियंताओं के साथ गाजियाबाद में ठाकुरद्वारा के वर्तमान फ्लाईओवर को लगभग 1 किलोमीटर तक फोरलेन करते हुए भाटिया मोड़ से जोड़ने तथा भाटिया मोड़ से पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड के निर्माण की संभावनाओं पर विचार किया गया। साथ ही, आरओबी के आगे डबल डेकर फ्लाईओवर के माध्यम से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) के ऊपर से क्रॉस कराते हुए नोएडा तक कनेक्टिविटी विकसित करने की परिकल्पना पर भी चर्चा की गई जिससे लाल कुंआ के पास लगने वाले जाम से निजात दिला कर आगामी पचास वर्षों के लिए इस क्षेत्र के यातायात को सुगम बनाया जा सके।जो लोग ग्रेटर नोएडा के तिलपता गोलचक्कर से वाया दादरी होकर छपरौला व लालकुआं पर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 9 तक के रास्ते से परिचित हैं वे मेरे साथ जरा संभलकर चलें। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने तिलपता गांव के बीच से गुजर रहे दादरी नोएडा मुख्य सड़क को जाम से बचाने के लिए अस्थाई डिवाइडर की व्यवस्था तो कर दी है परंतु वर्षों से चल रहे (एक वर्ष से अधिक समय को वर्षों कहा जा सकता है)सड़क और नाले का निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण यहां सड़क हमेशा तालाब का स्वरूप धारण किए रहती है। इस देरी के लिए अकेले प्राधिकरण जिम्मेदार नहीं है।तिलपता गांव के लोगों की भूमि से आसक्ति के चलते सड़क और नाले की मुक्ति नहीं हो पा रही है। यहां सड़क में गड्ढे नहीं हैं, गड्ढों में सड़क है। जलक्रीड़ा करते हुए कब गाड़ी गड्ढे में गिर जाए, कौन जाने। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने दादरी रेलवे रोड की दरिद्रता दूर कर दी है परंतु तिराहे पर आड़े तिरछे और विपरीत दिशा से आने जाने वाले वाहन वहीं खड़े पुलिसकर्मियों को चिढ़ाते रहते हैं। दादरी नगर में जीटी रोड पर अतिक्रमण है या अतिक्रमण में जीटी रोड का अवैध निकास है, यह गंभीर जांच का विषय है। दादरी से बाहर निकलते निकलते नयी अनाज व फल सब्जी मंडी में जितना कारोबार अंदर होता है, उससे अधिक उसके बाहर होता है इसलिए जीटी रोड पर हमेशा यातायात बाधित रहता है। यहां से लगभग दस किलोमीटर का सफर थोड़ा फर्राटा भरकर भी किया जा सकता है परंतु बिसरख मोड़ पर पहुंचते ही कदम थम जाते हैं। इस मोड़ से आने जाने वाले वाहन पहले एक रेलवे फाटक से होकर जाते थे जो अक्सर रेलगाड़ियों के आवागमन से बंद रहता था। इससे बिसरख मोड़ पर कमोबेश शांति रहती थी। अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने रेलवे ओवर ब्रिज बनाकर फाटक पर घंटों फंसे रहने वाले लोगों का आवागमन आसान कर दिया है परंतु वहां फंसे रहने वाले लोग अब बिसरख मोड़ पर फंसे रहते हैं। दरअसल किसी सुविधा को एक स्थान पर विकसित कर दूसरे स्थान के लिए समस्या पैदा कर देने का यह एक जीता-जागता उदाहरण है।आरओबी बनाने के साथ क्या प्राधिकरण को बिसरख मोड़ पर एक बांयी क्लोवर लीफ नहीं बना देनी चाहिए थी? लालकुआं जीटी रोड पर यातायात का एक हब है जहां चारों ओर से आने वाले वाहन एक दूसरे का रास्ता रोके खड़े रहते हैं। यहां दोनों ओर गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेटों की चौकियां हैं परन्तु यातायात संभालने को कोई तैयार नहीं है।लालकुआं के उस पार घंटाघर से डालडा आरओबी तक जीटी रोड पर जाम समाप्त करने के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा ऐलेवेटेड रोड बनाने की जिस योजना का ऊपर जिक्र किया गया है, यह अच्छा है बशर्ते कि यह परियोजना गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद की सीमा पर स्थित लालकुआं नामक यातायात हब को जाम से मुक्ति दिला दे। ऐसा न हो कि यह भी अपना यातायात भार लाकर लालकुआं पर छोड़ दे जहां पहले से ही अव्यवस्था व्याप्त है। जीटी रोड पर छपरौला से लेकर दुजाना द्वार तक कई स्थानों पर आधी सड़क तक पानी भरा हुआ था। इस पानी में कोई डूब नहीं सकता है परंतु सूखी सड़क पर चलने के अभ्यस्त लोग आधी सड़क से ही काम चला लेते हैं।(नेक दृष्टि)
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