यात्रा वृत्तांत (5) *राजू गाइड के साथ आगरा की ऐतिहासिक सैर*

_-राजेश बैरागी-_

जीवन में एक अच्छे मार्गदर्शक का क्या महत्व होता है,यह मैंने आगरा के लालकिले का भ्रमण करते हुए अनुभव किया।भारत के इतिहास में आगरा शहर का विशेष महत्व है। यह लंबे समय तक मुगलिया सल्तनत की राजधानी रहा है जिसके सजीव अवशेष इस शहर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हैं।10 सितंबर 2026 की सुबह राजू हमें आगरा किला और ताजमहल घुमाने ले गया। उससे पहले हम बीती रात वंदे भारत रेलगाड़ी से झांसी से आगरा पहुंचे तो वहां नियुक्त एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के सौजन्य से हमें वाहन और सरकारी गेस्ट हाउस में रहने की व्यवस्था हो गई थी।राजू ने रात्रि में ही हमें सूचित कर दिया था कि सुबह सवेरे किला और ताज घूमना अच्छा रहेगा। कालजई फिल्म ‘गाइड’ का नायक राजू(देवानंद)भी गाइड के किरदार में था।राजू दरअसल कोई पेशेवर गाइड नहीं है परंतु उसे आगरा की ऐतिहासिक इमारतों के बारे में किसी भी गाइड के मुकाबले अच्छा ज्ञान है।वह आगरा की सदर तहसील में कार्यरत है और यहां आने वाले विशिष्ट अतिथियों को ऐतिहासिक स्थलों को दिखाने के लिए उसे ही भेजा जाता है। मैं चालीस बरस पहले आगरा किला देखने आया था।तब और अब राजू की आंखों से देखने में जमीन आसमान का अंतर रहा।राजू बताता जा रहा था कि कहां दीवान ए ख़ास था और कहां दीवान ए आम।हमला होने पर बादशाह किन किन गुप्त रास्तों से सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकता था। उसने किले के भीतर लगने वाले मीना बाजार की जगह भी दिखाई और वह रैंप भी दिखाया जहां अपने घोड़े सरपट दौड़े आ सकते थे जबकि दुश्मनों को घोड़े सहित दोनों ओर से तेल और पानी छोड़कर फिसलने के लिए विवश किया जा सकता था। किसी भी किले को सुरक्षा के बड़े भरोसे के तौर पर जाना जाता है। हालांकि किलों में भ्रमण के दौरान मुझे हमेशा लगता है कि यहां रहने वाले लोग सुरक्षा के प्रति आश्वस्त रहते हुए भी कितना असुरक्षित अनुभव करते रहे होंगे। पग-पग पर सुरक्षाकर्मी, हमेशा किसी भी संकट या हमले से निपटने के लिए तैयारी, खुफिया कर्मियों का आवागमन,हर आने वाले को शक की निगाह से देखा जाना और अन्त:पुर की साजिशें। इससे अच्छा साधारण नागरिक बस्तियों में या जंगल में रहना होता होगा।ताज को लेकर जितनी भी कथा और दंतकथाएं हों या विवाद हों, उसकी खूबसूरती निर्विवाद है।राजू ताज से जुड़ी सुनी और अनसुनी कहानियां सुनाता जा रहा था और हम मंत्रमुग्ध से ताज को निहारते हुए उसके अंदर बाहर घूम रहे थे। ताजमहल अपने समय की वास्तुकला और भवन निर्माण की एक मिसाल है।राजु ने तेजोमहालय का भी जिक्र किया। मैंने उससे पूछा,-किसी ने अपना घर बेचा या दान किया तो उसमें बना मंदिर किसका? उसने कहा,-खरीदने वाले का। मैंने कहा,-फिर विवाद कैसा? आगरा में मेट्रो रेल ताज ईस्ट गेट से छः किलोमीटर दूर मनकामेश्वर तक चल रही है। शीघ्र ही दो अन्य कॉरीडोर पर चालू होगी तो लगभग तैंतीस किलोमीटर क्षेत्र को सेवा मिलने लगेगी। आगरा जिला और मंडल मुख्यालय भी है।अगली पोस्ट में आगरा की प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा होगी।(नेक दृष्टि)

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