राजेश बैरागी।क्या कोई आरोपी अपने लिए मनपसंद जेल का चयन कर सकता है? इसके साथ ही यह प्रश्न भी उठ खड़ा हुआ है कि क्या उत्तर प्रदेश की जेल दिल्ली की जेलों से बेहतर हैं?जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर में एक आरोपी ने अपनी जमानत खारिज करा कर इन दोनों ही प्रश्नों को लाजवाब कर दिया है।
जनपद गौतमबुद्धनगर के जिला न्यायालय में एक मुकदमे का सामना कर रहे एक आरोपी ने हाल ही में अपनी जमानत तुड़वाने की अर्जी दाखिल की। न्यायालय ने चौंकते हुए पूछा कि इस प्रकार तो मुवक्किल जेल जाना पड़ेगा। उसके अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि हां वह जेल जाना चाहता है। अदालत को कुछ समझ नहीं आया परंतु अर्जी पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लेने का आदेश दिया। अदालत में उपस्थित एक अन्य अधिवक्ता ने आरोपी के अधिवक्ता से माजरे की मालूमात की तो पता चला कि आरोपी दिल्ली की किसी अदालत में भी एक और मामले में वांछित है। फिलहाल वह अंतरिम जमानत पर चल रहा है जो शीघ्र ही समाप्त होने वाली है और नियमित जमानत मिलने की संभावना नहीं है। आरोपी चाहता है कि वह दिल्ली के बजाय गौतमबुद्धनगर की जेल में रहे। जमानत तुड़वाने का उद्देश्य यही है। इस घटना से आरोपियों में दिल्ली की जेलों की अपेक्षा उत्तर प्रदेश की जेलों पर बढ़ते विश्वास की भी झलक मिलती है










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