नोएडा ग्रेटर नोएडा यीडा और यूपीसीडा:तबादला एक्सप्रेस गुजर जाने की प्रतीक्षा में


-राजेश बैरागी-
लखनऊ में आजकल क्या चल रहा है? इस प्रश्न को कुछ देर के लिए प्रतीक्षा में रखते हुए यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा के मुख्यालय चलते हैं। तीन सप्ताह पहले यहां कार्यरत प्रबंधक स्तर के एक अभियंता को वरिष्ठ प्रबंधक पद पर प्रोन्नति मिली। उसके लिए यह खुशी की बात थी। परंतु वह अभियंता प्रोन्नति से भी ज्यादा खुश इस बात से था कि उसे प्रोन्नत होने के बावजूद यीडा में ही बरकरार रखा गया है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी को अपनी प्रोन्नति और वरिष्ठ प्रबंधक पद पर नियुक्ति के आदेश की प्रति देने के साथ वह अच्छी गुणवत्ता की मिठाई भी लेकर आया था जिसमें से हम पत्रकारों ने भी मिठाई खाते हुए उसकी दोहरी सफलता पर उसे शुभकामनाएं दीं।दो दिन पहले उस अभियंता को स्थानांतरित कर दिया गया है। सूत्र बता रहे हैं कि वह अपनी सफलता को बरकरार रखने में असफल रहा। नोएडा के एक अभियंता दो दिन लखनऊ में डेरा डालकर वापस लौट आए हैं। बताया जा रहा है कि तबादला और निलंबन रोकने के लिए जो अर्थदंड लगाया गया है, उसे चुकाने के लिए उन्हें सोच-विचार करना पड़ रहा है। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में लागू अंतर प्राधिकरण तबादला नीति में जनपद गौतमबुद्धनगर में कार्यरत तीनों औद्योगिक प्राधिकरणों नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा के साथ साथ यूपीसीडा भी एक महत्वपूर्ण किरदार बनकर उभरा है। हालांकि यूपीसीडा के नीति नियंताओं ने विकास कार्यों पर खुले हाथों से खर्च करना शुरू कर दिया है, फिर भी निगम से प्राधिकरण बना यूपीसीडा अभी भी यहां के प्राधिकरण कर्मियों के लिए काला पानी ही है। वहां कोई जाना नहीं चाहता। परंतु जैसे जेल जाने पर किसी का बस नहीं चलता वैसे ही यूपीसीडा जाने से कौन खुद को रोक सकता है। हालांकि पैसे वाले जेल जाने से भी बच जाते हैं और यूपीसीडा से भी। चारों प्राधिकरणों में अफरातफरी का माहौल है।तबादले से बचने और तबादला कराने पर जोरआजमाइस चल रही है। अभियांत्रिकी और सामान्य प्रशासन के कर्मचारी अधिकारी अपने काम से ज्यादा तबादला सूचियों पर दृष्टि जमाए बैठे रहते हैं। हालांकि नोएडा, ग्रेटर नोएडा में कुछ कर्मचारी और अधिकारियों को अमरता का वरदान प्राप्त है।2018 से लागू तबादला नीति इन लोगों का कभी बाल भी बांका नहीं कर पाई है।बाकी लोग इनसे गुरुमंत्र लेने की योजना बनाते रहते हैं और तबादले का शिकार हो जाते हैं। पोस्ट की शुरुआत में प्रश्न था कि लखनऊ में क्या चल रहा है। वहां 30 मई तक तबादलों का सौदा,क्षमा करें दौर चल रहा है और यहां तीस मई बीत जाने का इंतजार।(नेक दृष्टि)

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