ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर विशेष:भारतीय वायुसेना नोएडा में तलाश रही है अपनी अरबों रुपए की भूमि, मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी है मामला


-राजेश बैरागी-
आज ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ है।विविध भारती और एफ एम गोल्ड रेडियो पर प्रतिदिन भारतीय सेना के सम्मान में एक बहुत ही ओज पूर्ण गीत प्रस्तुत किया जाता है। इस गीत में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारतीय सेना के पराक्रम के बारे में बताते हैं तो कैलाश खेर बोलकर और गाकर भारतीय सेना के शौर्य के कसीदे पढ़ते हैं। क्या भारत की सेना वास्तव में इतनी ही शक्तिशाली है? यदि ऐसा है तो नोएडा के यमुना किनारे पर उसकी लगभग चार सौ एकड़ भूमि पर कौन कब्जा कर बैठ गया है जिसे न तो वायुसेना और न कोई सरकार ही मुक्त करा पा रही है।
नोएडा के यमुना किनारे के कई गांवों में फैली वायुसेना की 377 एकड़ (216 और 161 एकड़)भूमि लापता है।यह भूमि अचानक गायब नहीं हुई है। वायुसेना अपनी इस भूमि को 1950 से तलाश रही है। पहले हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के सीमा विवाद के साथ यमुना नदी की बदलती धारा के कारण कभी यह भूमि इधर उधर होती रही। वायुसेना भी अपनी शक्ति के मद में भूमि को नियंत्रण में रखने के प्रति लापरवाह रही होगी।1976 में नोएडा की स्थापना और यमुना नदी को दो पाटों के बीच बांध देने से भूमि के अपहर्ताओं की दृष्टि एयरफोर्स की इस भूमि पर भी पड़ गई। विगत तीस चालीस वर्षों में यहां फार्म हाउस से लेकर अन्य व्यवसायिक और आवासीय गतिविधियां शुरू हो गईं। कभी चोर डकैतों और अंग्रेजी हुकूमत के विरोधियों के छिपने की इस जगह पर रात के अंधेरों में मस्ती से भरी पार्टियां होने लगीं। यहां फार्म हाउस बनाने वाले लोगों में देश के बहुत से नामचीन अमीर, राजनेता और उद्योगपति बताए जाते हैं तो यहां होने वाली पार्टियों में भी दिल्ली एनसीआर के बिगड़ैल अमीर और ओहदेदार शामिल होते हैं। वायुसेना अपनी भूमि को वापस पाने के लिए लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री के दरबार में भी हाजिरी लगा चुकी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मेरठ मंडलायुक्त के नेतृत्व में गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन वायुसेना की भूमि तलाश रहा है। हालांकि इस तलाश में औपचारिकता अधिक है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने जिले में नियुक्त एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को अलग से इस मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी है।(नेक दृष्टि)

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