गाजियाबाद नगर निगम का नींबू पानी अभियान


-राजेश बैरागी-
हालांकि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना और जीडीए प्राधिकरणों में हमेशा से आगंतुकों को चाय पानी पिलाने का रिवाज है और खास लोगों की तो कोई बात ही नहीं है। उन्हें तो जो मांगे सो हाजिर। गाजियाबाद नगर निगम ने संभवतः पहली बार अपने आगंतुकों को ताजा नींबू पानी पिलाने की व्यवस्था की है। यह लगभग चार हजार करोड़ रुपए के बजट से चलने वाला नगर निगम है। इसकी जिम्मेदारी चार दरवाजों क्रमशः जवाहर गेट, दिल्ली गेट, डासना गेट और सिहानी गेट के भीतर सिमटे पुराने गाजियाबाद शहर के मुकाबले दस किलोमीटर गुणा दस किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैले नये गाजियाबाद की आम नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त रखना है। निगम अपने अधिकांश काम ठेकेदारों से कराता है इसलिए हजारों कर्मचारियों के साथ ठेकेदारों की भी लंबी चौड़ी फौज निगम में दिखाई पड़ती है। मुझे लगता है कि बहुत महंगा चल रहा दस किलोग्राम नींबू तो निगम कर्मी और ठेकेदारों के ही उदरस्थ हो जाया करेंगे। कड़ी धूप और गर्मी से लस्त-पस्त निगम पहुंचने वाले लोगों को ताजा नींबू पानी मिलना किसी टॉनिक से कम नहीं होगा। निगमायुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की इस पहल का सभी पार्षदों ने स्वागत किया है। उन्होंने निगम के जोनल कार्यालयों में भी ऐसी ही व्यवस्था कराने की मांग की है। निगम ने शहर के अधिकांश चौराहों पर ग्रीन नेट लगवाकर रेड लाइट पर रुकने वाले लोगों का धूप और गर्मी से बचाव का इंतजाम भी किया है। हालांकि महानगर में सड़कों पर रोजगार करने वाले लोगों तक निशुल्क पेयजल की पहुंच बेहद कम है।(नेक दृष्टि)

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