नोएडा के वेदवन और बुलंदशहर के महर्षि वन के बाद भारतीय अध्यात्म और सनातन पर आधारित तीसरा पार्क होगा जीडीए का संस्कृत दर्शन पार्क


-राजेश बैरागी-
नोएडा में 100 एकड़ भूमि पर बने वेदवन और बुलंदशहर में चार एकड़ भूमि पर बनाए गए महर्षि वन के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण इंदिरापुरम में साढ़े चौदह एकड़ भूमि पर संस्कृत दर्शन पार्क विकसित कर रहा है। भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की थीम पर आधारित यह पार्क इसी जून माह में जनता को समर्पित किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा संस्कृत दर्शन पार्क एक विशिष्ट एवं महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसका निर्माण कार्य अगस्त, 2025 में प्रारंभ किया गया था तथा प्राधिकरण द्वारा इसे जून, 2026 तक पूर्ण कर जनसामान्य को समर्पित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दो दिन पहले जीडीए उपाध्यक्ष नन्द किशोर कलाल ने लोकार्पण के लिए लगभग तैयार इस पार्क का सचिव विवेक कुमार मिश्रा व अन्य अधिकारियों सहित भ्रमण कर निर्माण कार्य की समीक्षा की थी।
यह पार्क केवल एक सामान्य उद्यान न होकर भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र होगा। पार्क में संस्कृत भाषा, वेदों, उपनिषदों, महाकाव्यों एवं भारतीय चिंतन परंपरा से संबंधित विभिन्न विषयों को आधुनिक एवं आकर्षक माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही परिसर में थीम आधारित कलात्मक संरचनाएँ, संस्कृत श्लोक एवं सूक्तियों की प्रदर्शनी, आकर्षक लैंडस्केपिंग, जल संरचनाएँ, फाउंटेन, ओपन एयर गतिविधि क्षेत्र, बैठने की आधुनिक व्यवस्था, प्रकाश सज्जा तथा आगंतुकों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के एनसीआर में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्ञान परंपरा पर आधारित यह तीसरा महत्वपूर्ण पार्क है। इससे पहले इसी प्रकार की थीम पर आधारित नोएडा प्राधिकरण द्वारा सेक्टर 78 में 100 एकड़ भूमि पर वेदवन की स्थापना की गई है। तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने विशेष रुचि लेकर इस पार्क का निर्माण कराया था। इसी प्रकार बुलंदशहर खुर्जा विकास प्राधिकरण की पूर्व उपाध्यक्ष अंकुर लाठर ने ट्रांसपोर्ट नगर में चार एकड़ भूमि पर महर्षि वन का निर्माण कराया था जिसे गत 16 मार्च को उत्तर प्रदेश के वन राज्य मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने जनता को समर्पित किया था।(नेक दृष्टि)(

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