
-राजेश बैरागी-
क्या कोई दुर्घटना किसी व्यक्ति को दंतचिकित्सक से आईएएस बना सकती है?राजस्थान के भीलवाड़ा में जन्मे गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए)के वर्तमान उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल को उनके अध्यापक पिता शल्य चिकित्सक बनाना चाहते थे। पिता की इच्छा के अनुसार 2007 में उन्होंने पीएमटी की परीक्षा दी।102 वीं रैंक के साथ राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिला मिलना सुनिश्चित हो गया। परिचितों, रिश्तेदारों को पार्टी भी दे दी गई। जिस दिन रात्रि में पार्टी दी गई, उसके अगले दिन सुबह पता चला कि उच्च न्यायालय के एक निर्णय से उस वर्ष का पीएमटी परीक्षा परिणाम बदल गया है और बदले हुए परीक्षा परिणाम में नंदकिशोर कलाल 207वीं रैंक पर पहुंच गए हैं। एमबीबीएस में दाखिला 205वीं रैंक तक हो सकता था। एमबीबीएस और उसके बाद एम एस करने का सपना देख रहे उस नई उम्र के युवक के लिए यह किसी मानसिक आघात से कम नहीं था।विवश होकर जयपुर स्थित एस एम एस कॉलेज में बीडीएस में प्रवेश ले लिया।चार वर्ष तक वहां पढ़ाई भी की परंतु मन और मस्तिष्क इस अनहोनी से तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे।2011 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में हिस्सा लिया और पहले ही प्रयास में भारतीय राजस्व सेवा में चुन लिए गए। इससे भी उन्हें संतुष्टि नहीं मिली।2012 में फिर यूपीएससी की परीक्षा दी और आईपीएस के लिए चुने गए। जम्मू-कश्मीर कैडर मिला जिसपर माता-पिता राजी नहीं हुए।2013 में फिर परीक्षा दी और इस बार हरियाणा कैडर मिला। आईपीएस का प्रशिक्षण लेने के दौरान फिर यूपीएससी की परीक्षा दी और कोई रैंक नहीं मिली।इन सफलताओं और असफलताओं के बाद एक बार और परीक्षा देने की जिद क्या समझदारी माना जाना चाहिए? परंतु उन्होंने 2017 में ऐसा किया और इस बार वो मंजिल मिल ही गई जिसे पाने के लिए छः वर्ष की प्रतीक्षा और चार परीक्षाओं का सामना किया गया था।2018 बैच का आईएएस और उत्तर प्रदेश कैडर मिलने पर नंदकिशोर कलाल ने अपने कैरियर की विधिवत शुरुआत की। जीडीए उपाध्यक्ष बनने तक उनके कैरियर पर चर्चा अगले अंक में करूंगा।(नेक दृष्टि)
Leave a Reply