
_-राजेश बैरागी-_
ईंधन तेल चालित और इलेक्ट्रिक बसों के बरअक्स एनटीपीसी के सौजन्य से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में चलाई गई तीनों ग्रीन हाइड्रोजन बसों के पहिए दो महीने चलने के बाद तकनीकी खामियों के चलते फिलहाल थम गये हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि पूरे विश्व में तीन अन्य देशों में शुरू की गई ग्रीन हाइड्रोजन चालित बसें अभी तक सफल नहीं हो पाई हैं।यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में स्वच्छ वातावरण के लिए शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली ग्रीन हाइड्रोजन चालित बसें चलाने की मुहिम फिलहाल थम गई है। ये बसें महारत्न कंपनी एनटीपीसी द्वारा यमुना प्राधिकरण को उपलब्ध कराई गई है। अशोक लेलैंड द्वारा अपने चेन्नई स्थित प्लांट में विकसित इन बसों में फ्यूल इंजेक्शन टेक्नोलॉजी टोयोटा जापान से आयातित है।एनटीपीसी इन बसों को ग्रेटर नोएडा स्थित अपने हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र से ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन दे रहा है।गत 12 जून को इन बसों को अन्य इलेक्ट्रिक बसों के साथ धूमधाम से सड़क पर उतारा गया था। लगभग दो महीने तक चलने के बाद इन बसों के फ्यूल इंजेक्टर में समस्या उत्पन्न हो गई है। चूंकि इस प्रकार की बसों की प्रोद्योगिकी भारत में नहीं है। इसलिए इनका संचालन ठप्प हो गया है और जापान से इन बसों के इंजन विशेषज्ञों को बुलाया गया है। उनके यहां पहुंचने और तकनीकी रूप से दुरुस्त करने के बाद ही ये बसें पुनः सड़कों पर उतर पाएंगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जापान, चीन और कोरिया देशों ने अपने यहां पायलट प्रोजेक्ट के तहत ग्रीन हाइड्रोजन चालित बसें सड़कों पर उतारी थीं। जानकारों के अनुसार इन देशों में भी इन बसों का संचालन केवल औपचारिक बन कर रह गया है। यमुना प्राधिकरण इन बसों को संचालित करने वाला विश्व में चौथा और भारत में पहला प्राधिकरण है। हालांकि यह बसें अभी सबसे महंगे 165 रुपए प्रति किलोमीटर खर्च पर चलने वाली बसें हैं। इसमें से 58 रुपए यमुना प्राधिकरण को भुगतान करने पड़ते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी को भी इस प्रकार की बसें चलाने का कोई अनुभव नहीं है। उसने ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने के पीएमओ के अभियान के तहत इन बसों को चलाया है। हालांकि एनटीपीसी एक लंबे समय से अपने बिजली उत्पादन संयंत्रों में जेनरेटर कूलिंग सिस्टम को हाइड्रोजन से ही चलाता आ रहा है।(नेक दृष्टि)
(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)
Leave a Reply