_-राजेश बैरागी-_
नोएडा सेक्टर 11 के निवासियों का अगले दो वर्षों तक पिछले दो वर्षों से नेतृत्व कर रहे आरडब्ल्यूए पदाधिकारी ही नेतृत्व करेंगे।गत 23 अगस्त को संपन्न आरडब्ल्यूए चुनाव में लगभग 5 हजार लोगों की आबादी वाले इस आवासीय सेक्टर के मात्र 50 लोग ही शामिल हुए।न कोई चुनाव लड़ने आया और न किसी ने समर्थन ही दिया।भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी खूबसूरती यह है कि यहां उपेक्षा और मौन को भी समर्थन मान लिया जाता है। आवासीय सेक्टर 11 नोएडा में तीन वर्ष पहले हुए आरडब्ल्यूए चुनाव में जमकर जोर आजमाइश हुई थी।तब अपने पैनल से एकमात्र अध्यक्ष पद पर अंजना भागी को सफलता मिली थी जबकि वर्षों से आरडब्ल्यूए पर कब्जा जमा कर बैठे पैनल ने शेष पदों पर विजय हासिल की थी। एक वर्ष पूरा होने से पहले ही अध्यक्ष पद से अंजना भागी को कथित तौर पर अवैध रूप से हटा दिया गया। इस संबंध में एक मुकदमा जिला न्यायालय में लंबित है। फिर चुनाव की औपचारिकता हुई और अजय गुप्ता और उनके पैनल ने एकतरफा जीत हासिल की। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस मध्यावधि चुनाव में अंजना भागी ने हिस्सा नहीं लिया था। पिछले दो वर्षों में अजय गुप्ता और उनकी टीम ने अतिसक्रियता के साथ आरडब्ल्यूए को संचालित किया है।गत 2 अगस्त को पुनः अगले कार्यकाल के लिए आम सभा बुलाकर चुनाव की घोषणा की गई। बताया गया है कि आम सभा में मात्र 49 लोग शामिल हुए। चुनाव अधिकारी के रूप में आजीवन पद धारण कर चुके एक निवासी देवकीनंदन ने चुनाव कार्यक्रम घोषित किया। हालांकि 31 मार्च 2026 तक सदस्य बने निवासियों को ही इस चुनाव में भाग लेने का अधिकार दिया गया। पूरी चुनाव प्रक्रिया इतनी शांतिपूर्वक संपन्न हुई कि किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई। कोई खर्चा नहीं, कोई पर्चा नहीं तो कोई चर्चा भी नहीं हुई। अंततः 23 अगस्त की वह ऐतिहासिक तिथि आ गई जब मतदान होना था परंतु निवर्तमान कार्यकारिणी के अतिरिक्त किसी ने दावेदारी नहीं की तो मतदाता कैसा। सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। हालांकि इस प्रकार निर्विरोध निर्वाचन में कोई हर्ज नहीं है परंतु क्या इस सेक्टर के लोग ‘कोऊ हो नृप हमें का हानि’ जैसे निराशा के भाव से ग्रस्त हैं?हो सकता है लोग लड़कर भी जीत न पाने की भावना से ओत-प्रोत हों।(नेक दृष्टि)
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