
_-राजेश बैरागी-_
क्या योगी आदित्यनाथ सरकार के राज्यमंत्री और सहारनपुर के देवबंद से विधायक कुंवर ब्रिजेश सिंह गौतमबुद्धनगर के किसी विधानसभा क्षेत्र से आगामी चुनाव में प्रत्याशी हो सकते हैं? शीर्ष भाजपा नेतृत्व के अपुष्ट सूत्र दावा कर रहे हैं कि कुंवर ब्रिजेश सिंह के लिए जेवर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की संभावना तलाशी जा रही है। कुंवर ब्रिजेश सिंह योगी आदित्यनाथ सरकार में लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री के साथ गौतमबुद्धनगर जनपद के प्रभारी मंत्री भी हैं। प्रभारी मंत्री होने के नाते उनका गौतमबुद्धनगर में नियमित आवागमन तो होता ही रहता है,उनका स्थानीय भाजपा संगठन और आम नागरिकों से भी गहरा जुड़ाव बना हुआ है। उन्होंने 2017 में सहारनपुर की देवबंद सीट से पहली जीत हासिल की थी जिसपर 2002 से भाजपा निरंतर हार रही थी।उनका राष्ट्रीय सेवक संघ से भी पुराना नाता है। कुंवर ब्रिजेश सिंह को गौतमबुद्धनगर की जेवर सीट से चुनाव लड़ाने के कई कारण हो सकते हैं। गठबंधन के चलते जेवर सीट पर रालोद अपना दावा ठोंक सकता है। पिछले चुनाव में रालोद प्रत्याशी इस सीट पर दूसरे स्थान पर रहा था। इस बार उसके दावे को नकारना भाजपा के लिए मुश्किल हो सकता है। कुंवर ब्रिजेश सिंह की दावेदारी के समक्ष रालोद का दावा कमजोर पड़ सकता है। भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर हालिया बदलाव के बाद जेवर के वर्तमान विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह की पैरवी भी कमजोर पड़ गई है जबकि पार्टी के भीतर उनके धुर विरोधी गुट की शक्ति बढ़ी है। धुर विरोधी गुट भी धीरेंद्र सिंह के स्थान पर कुंवर ब्रिजेश सिंह को चुनाव लड़ाने का पुरजोर पक्षधर है। कुंवर ब्रिजेश सिंह की दावेदारी का कमजोर पक्ष उनका निरंतर दो बार मुस्लिम बहुल देवबंद सीट से जीत हासिल करना हो सकता है। भाजपा उस सीट पर प्रत्याशी बदलने का जोखिम लेना चाहेगी या नहीं। हालांकि एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए भाजपा प्रत्येक चुनाव में जिस प्रकार कुछ विधायकों सांसदों का टिकट काटने से लेकर उनके निर्वाचन क्षेत्र बदलने की प्रक्रिया अपनाती है, उसके अनुसार कुंवर ब्रिजेश सिंह को जेवर शिफ्ट किया जा सकता है। इससे धीरेंद्र सिंह के सामने अपने राजनीतिक जीवन मरण का प्रश्न खड़ा हो सकता है। ऐसे में उनके द्वारा किसी अन्य राजनीतिक दल में जाने और उसके टिकट पर चुनाव लड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है। पिछले दिनों उनके द्वारा किन्हीं विपक्षी दलों के बड़े नेताओं से मिलने जुलने की भी चर्चा रही थी।(नेक दृष्टि)
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