निजी सुरक्षा एजेंसियों के गार्डों को जीवनयापन के लिए करना पड़ता है दो जगह काम

_-राजेश बैरागी-_

क्या हम जानते हैं कि छोटे बड़े, सरकारी गैर सरकारी संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों के दरवाजों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले निजी सुरक्षा एजेंसियों के गार्ड किस प्रकार जीवनयापन करते हैं? मामूली वेतन पर नौकरी करने वाले निजी सुरक्षा एजेंसियों के अधिकांश गार्ड कम से कम दो स्थानों पर या 16 घंटे ड्यूटी करने के बाद ही अपना और अपने बीवी बच्चों का पेट भरने लायक कमा पाते हैं।नेक दृष्टि द्वारा नोएडा ग्रेटर नोएडा में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले लोगों के जीवनयापन पर किए गए अध्ययन से यह जानकारी सामने आई है कि अमूमन सभी निजी सुरक्षा एजेंसियां निर्धारित श्रम कानूनों का पालन नहीं करती हैं। खासतौर पर निजी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा नौकरी पर रखे जाने वाले गार्डों को न्यूनतम वेतन नहीं दिया जाता है। सुरक्षा गार्ड की नौकरी अकुशल श्रमिक की श्रेणी में आती है। हालांकि संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों के दरवाजों पर तैनात गार्ड आगंतुकों से आवश्यक पूछताछ,उनका ब्यौरा दर्ज करने, इंटरकॉम पर उनके संबंध में भीतर सूचना देने तथा आवश्यकता पड़ने पर हाथापाई जैसे कुशलता के कार्य करते हैं। इसके बावजूद उन्हें अकुशल श्रमिकों की श्रेणी में रखकर उनके वेतन का निर्धारण किया जाता है।हाल ही में नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने अकुशल श्रमिकों को ₹13690/- न्यूनतम वेतन निर्धारित किया है। क्या सभी सुरक्षा गार्डों को न्यूनतम वेतन प्राप्त हो रहा है? सरकारी, अर्द्ध सरकारी,गैर सरकारी संस्थानों तथा औद्योगिक इकाइयों में तैनात सुरक्षा गार्डों को निजी सुरक्षा एजेंसियां 10-11 हजार रुपए से अधिक वेतन नहीं देती हैं। कहीं कहीं यह वेतन बारह घंटे काम कराने के बदले दिया जाता है। नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर 96 स्थित नये कार्यालय में तैनात कई सुरक्षा गार्डों ने बताया कि उन्हें मात्र दस हजार रुपए वेतन मिलता है इसलिए वे दूसरे स्थान पर भी आठ घंटे की ड्यूटी करते हैं। दोनों जगह काम करने से उनकी आमदनी लगभग बीस हजार रुपए प्रतिमाह हो जाती जिससे वे अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं। हालांकि ग्रेटर नोएडा में बिजली वितरण कंपनी एनपीसीएल के कार्यालयों पर तैनात निजी सुरक्षा एजेंसी के गार्ड वेतन के मामले में किस्मत के धनी हैं। उन्हें लगभग बाइस से अट्ठाइस हजार रुपए वेतन मिलता है। करोड़ों रुपए कीमत और महत्वपूर्ण कार्यालयों, संस्थानों तथा औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा संभालने वाले सुरक्षा गार्डों के जीवनयापन की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार के कानून लागू कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की उपेक्षा के चलते श्रम कानून केवल दिखावे की वस्तु बन गये हैं।(नेक दृष्टि)

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