
_-राजेश बैरागी-_
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों गत 27 जून को उद्घाटित नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर 96 स्थित नये कार्यालय में दो दिन बाद ही बड़ा कक्ष लेने के लिए अधिकारियों में कल जूतमपैजार की नौबत आ गई। दोनों अधिकारियों ने एक एक बार एक-दूसरे की नाम पट्टिकाएं उखड़वा दीं। अंततः एक अधिकारी ने अपने स्टाफ की शक्ति का प्रयोग कर बड़े कक्ष पर कब्जा जमा लिया। इस घटना से प्राधिकरण के लगभग चार अरब रुपए से बने नये कार्यालय में अधिकारियों के कमरे आवश्यकता के हिसाब से न बने होने की समस्या एक बार फिर उजागर हो गई है।सेक्टर 96 में नवनिर्मित नोएडा प्राधिकरण के नये मुख्यालय का उद्घाटन हाल ही में 27 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। वर्तमान में इस मुख्यालय में अधिकारियों के कार्यालय सेक्टर 6 स्थित पुराने कार्यालय से शिफ्ट किए जा रहे हैं।नये कार्यालय में अधिकारियों को उनके पद और आवश्यकता के हिसाब से कमरे आवंटित किए गए हैं।पंचम तल पर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विशेष कार्याधिकारी व अभियांत्रिकी विभाग के महाप्रबंधक और उपमहाप्रबंधक के कार्यालय बनाए गए हैं। इनमें से एक बड़े कक्ष को बैठने के लिए एक विशेष कार्याधिकारी ने चुना। उन्होंने अपने स्टाफ से उस कमरे पर अपने नाम व पदनाम की पट्टिका लगवा ली।उसी कमरे पर एक महाप्रबंधक सिविल की भी दृष्टि गड़ी हुई थी। उन्हें जैसे ही विशेष कार्याधिकारी द्वारा उस कमरे पर कब्जे का पता चला, उन्होंने अपना स्टाफ भेजकर विशेष कार्याधिकारी की नाम पट्टिका उखड़वा कर अपनी नाम पट्टिका लगवा दी। विशेष कार्याधिकारी को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने भी अपना स्टाफ भेजकर महाप्रबंधक की नाम पट्टिका उखड़वा कर फिर अपनी नाम पट्टिका लगवा दी। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। महाप्रबंधक सिविल ने एक बार फिर विशेष कार्याधिकारी की नाम पट्टिका उखड़वा कर अपनी नाम पट्टिका लगवाई और उस कमरे पर कब्जा करके बैठ भी गए। कहा भी गया है कि कब्जा सच्चा और झगड़ा झूठा होता है।दो अधिकारियों के बीच नये कार्यालय में बड़ा कमरा लेने के लिए हुए इस झगड़े की समूचे प्राधिकरण में कानों-कान चर्चा हो रही है। उल्लेखनीय है कि नया कार्यालय अत्याधुनिक, विशाल और भव्य बनाया गया है।इसपर तीन सौ नब्बे करोड़ रुपए खर्च आया है।सात मंजिला इस इमारत में प्राधिकरण अध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी,अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों, सहित सभी विभागाध्यक्षों के कार्यालय और जनसुनवाई केंद्र भी बनाया गया है। इस कार्यालय के निर्माण के दौरान ही अधिकारियों के कमरों के आकार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ लोकेश एम ने विशेष रुचि लेकर अधिकारियों के कमरों के आकार में वृद्धि करवाई थी। इसके बावजूद सभी कमरों का आकार आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। कमरों को लेकर अधिकारियों का टकराव उसी कमी का परिणाम है।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)
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