नोएडा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण मुख्यालयों का एक है योजनाकार, दोनों में ही है अधिकारियों के कमरों का बेढब आकार

_-राजेश बैरागी-_

नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों के मुख्यालयों का डिजाइन और निर्माण की रूपरेखा एक ही वास्तुकार/योजनाकार ने तैयार की है।डिजाइनर एसोसिएट्स भवनों के डिजाइन बनाने के क्षेत्र में एक बड़ा नाम बताया जाता है। दोनों प्राधिकरणों के अपने अपने लंबे चौड़े नियोजन विभाग हैं परन्तु उनपर अपने कार्यालय भवन का डिजाइन बनाने जैसा भरोसा नहीं किया गया।दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि नोएडा के सेक्टर 96 स्थित नवनिर्मित और ग्रेटर नोएडा के कई वर्ष पूर्व बने प्राधिकरण भवनों में अधिकारियों व कर्मचारियों के कक्ष आवश्यकता के अनुरूप नहीं बने हैं। यही नहीं, अपने कार्यों के लिए दोनों प्राधिकरणों में आने वाले लोगों के बैठने के लिए भी कोई स्थान (आगंतुक कक्ष या प्रतीक्षालय) तक नहीं बनाए गए हैं।यह विडंबना ही है कि अरबों रुपए खर्च करने के बाद भी नोएडा प्राधिकरण का नवनिर्मित मुख्यालय उस अपेक्षा को शायद ही पूरा करे जिसके लिए किसी भी सरकारी संस्थान के प्रशासनिक भवन को बनाया जाता है।24000 वर्ग फुट क्षेत्र में बनाए गए इस सात मंजिला भवन को बाहर से देखने पर यह किसी स्टूडियो जैसा दिखाई देता है। इसमें आमने-सामने बने कमरों के बीच पतली पतली गैलरियां हैं। आमतौर पर ऐसे प्रशासनिक भवन में प्रतिदिन आने वाले लोगों की संख्या अच्छी-खासी होती है। उनके बैठने के लिए यहां कोई प्रतीक्षालय या आगंतुक कक्ष नहीं बनाया गया है। क्या यह मैक डोनाल्ड जैसा टेक अवे रेस्टोरेंट है जहां एक खिड़की से बिल भुगतान कर अगली खिड़की से खाने का पैकेट लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो जाते हैं? प्राधिकरणों में दिनभर जरूरत बेजरूरत बैठकों का दौर चलता है। अधिकारी ऐसी बैठकों में व्यस्त रहते हैं। आगंतुकों को उनकी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। प्रतीक्षालय ऐसे स्थान पर होने चाहिएं जहां से अधिकारी या कर्मचारी के बैठने का स्थान दिखाई देता रहे ताकि बैठक या बैठकों के बीच अपने कक्ष में आने पर उससे मिला जा सके। इस भवन में बने कक्षों को गैलरी के एक सिरे से दूसरे तक देखना संभव नहीं है। पांचवें तल पर लिफ्ट एरिया शीशे के दरवाजों के भीतर है जहां आजकल की गर्मी में रुकना कष्टप्रद है। अधिकारियों के कक्षों के आकार उनमें बैठने वाले अधिकारियों के बीच झगड़े का सबब बन रहे हैं। कुछ अधिकारी इस नये भवन में स्थानांतरित होने को तैयार नहीं हैं।पहले ये कक्ष और भी छोटे आकार के थे जिन्हें पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बढ़वाया था। दक्षिणमुखी होने के कारण दिन के अपराह्न में इसपर देर तक धूप की उपस्थिति बनी रहेगी और गर्मी भी। कारपोरेट की तर्ज पर बनाये गये इस भवन में डिजाइनर ने प्रत्येक तल पर कमरे, लॉबी बनाने में कंजूसी क्यों बरती,यह समझ से परे है। हालांकि उसके डिजाइन को स्वीकार करने वाले अधिकारियों की समझ पर भी सवाल तो खड़े होने ही हैं।ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्यालय भवन का डिजाइन भी डिजाइनर एसोसिएट्स ने तैयार किया था। इसका डिजाइन नोएडा प्राधिकरण के भवन से कमोबेश बेहतर है। यहां सभी कक्ष शीशे की दो और तीन दीवारों से घिरे हुए हैं। इसलिए कक्षों को थोड़े परिश्रम से घटाया बढ़ाया जा सकता है। परंतु अधिकांश अधिकारियों के कक्ष वर्गाकार न होकर आयताकार हैं। उन्हें ज्यादा आधुनिक बनाने के फेर में अजीबोगरीब बना दिया गया है। यह भवन तीन हिस्सों में विभाजित है। आगे की बिल्डिंग टावर टू कहलाती है, हालांकि यह है टावर वन।इसी कारण प्रतिदिन यहां आने वाले लोग टावर वन और टू की उलट स्थिति के चलते भटकते रहते हैं। बहरहाल टावर टू चार मंजिला है और टावर वन 21 मंजिल की है।टावर टू में तीसरे तल पर मुख्य कार्यपालक और अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के कक्ष हैं। उन्हें देखकर इस शहर को चलाने वाले प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों के कार्यालय होने की अनुभूति नहीं होती। यहां दूसरे और चतुर्थ तल पर बने कार्यालय कक्ष फिर भी अच्छे हैं और एकमात्र अच्छा कक्ष चुनने के लिए कहा जाए तो चतुर्थ तल पर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सौम्य श्रीवास्तव का कक्ष है जो किसी शीर्ष अधिकारी का कक्ष होने की फीलिंग देता है।टावर वन में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, विशेष कार्याधिकारी आदि अधिकारियों के कार्यालय हैं। चतुर्थ तल पर नियोजन विभाग के महाप्रबंधक का कक्ष बेहद छोटा है। वरिष्ठ प्रबंधक का कक्ष भी उनके पास आने वाले आगंतुकों की संख्या का सामना नहीं कर पाता है। छठे तल पर महाप्रबंधक सिविल का कक्ष भी ऐसा ही है लंबा और गैलरीनुमा।यहां प्रत्येक तल पर प्रतीक्षालय या लॉबी जैसा कुछ है, वहां कुछ बेंचनुमा बैठने का साधन भी रहता है परंतु यह केंद्रीयकृत वातानुकूलित भवन से अलग रहता है। यह भवन भी लगभग चार सौ करोड़ रुपए से बना था परंतु उपयोग के लिए तय तलों पर अधिकारियों और विभागों के कार्यालय स्थापित न होने से एक बहुत उपयोगी इमारत केवल कामचलाऊ बनकर रह गई है।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइटwww.nekdristi.com देखें)

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