
_-राजेश बैरागी-_
1994 में लगभग चालीस बरस तक अपनी पीठ पर नोएडा ग्रेटर नोएडा दादरी के बीच आने-जाने वालों को हिंडन नदी पार कराने वाला एकमात्र पुल का एक हिस्सा अचानक टूट कर गिर गया था। कुलेसरा गांव के निकट 1960 के दशक में बना यह पुल केवल एक नदी को पार कराने का साधन नहीं था बल्कि हिंडन नदी से विभाजित दादरी तहसील के दो हिस्सों को एकजुट रखने वाली मानव-निर्मित एक भौतिक संरचना भी थी।जब इस पुल का एक हिस्सा टूटा तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा से लेकर दादरी तक कोहराम मच गया था। नोएडा में रोजाना रोजगार करने जाने वाले हजारों लोगों के लिए तो जैसे नोएडा सात समुंदर पार हो गया था। नोएडा पुलिस के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी आर के चतुर्वेदी ने देर शाम पुल का निरीक्षण करने के बाद पुलिसकर्मियों की निगरानी में पैदल लोगों को पुल से गुजरने की अनुमति दी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष सह मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि माथुर ने आनन-फानन में हिंडन नदी पर एक नये और दोगुनी क्षमता का पुल बनाने की योजना तैयार की और लगभग डेढ़ वर्ष में नया पुल बनवाकर तैयार कर दिया। पुराने पुल को उसके हाल पर छोड़ दिया गया।टूटे हुए हिस्से पर कंक्रीट डालकर मरम्मत की गई परन्तु उसे उपयोग के लायक नहीं माना गया।तब से यह पुराना जर्जर पुल अपनी बेनूरी पर जैसे रो रहा है। इसके ऊपर झाड़ झंखाड़ उग आए हैं। कोई उसपर से आता जाता नहीं है परंतु अब लोग उसके नीचे से गुजरने लगे हैं। खासतौर से बच्चे और किशोर उस पुल के नीचे से न केवल गुजरते हैं बल्कि वहां हिंडन नदी के किनारे खेलते भी हैं। यह पुल झड़ रहा है। इसके निचले हिस्से से बड़े बड़े टुकड़े टूट कर गिरते रहते हैं। इसके नीचे से निरंतर गुजरने वाले बच्चों बड़ों के लिए यह खतरे की घंटी बन गया है। आज ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अभियंताओं के निरीक्षण के दौरान भी एक बड़ा टुकड़ा टूट कर नदी में गिरा। अभियंताओं का मानना है कि इससे पहले कि कोई बड़ी दुर्घटना हो,इस पुल को यथाशीघ्र पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए। ध्वस्त करने के बाद वहां वर्तमान पुल के समानांतर एक और पुल भी बनाया जा सकता है।(नेक दृष्टि)
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