आग की घटनाओं के बीच फर्जी फायरकर्मी की सालों अवैध वसूली

_-राजेश बैरागी-_

यह सच है कि नकली मुद्रा असली मुद्रा के बाजार में ही चलती है।दो दिन पहले नोएडा के एक औद्योगिक/व्यवसायिक सेक्टर में एक फर्जी फायर ब्रिगेड कर्मचारी पकड़ा गया।वह पहले फायर ब्रिगेड नोएडा में ही कार्यरत था।तीन वर्ष पहले सेवानिवृत्त होने के बाद उसने फैक्ट्री व दुकानों से अग्नि सुरक्षा के नाम पर वसूली का धंधा जारी रखा और अपने पुत्र को अग्नि सुरक्षा उपकरणों की दुकान भी खुलवा दी।खराब किस्मत के चलते वह एक फैक्टरी मालिक के द्वारा धर लिया गया। माफीनामा लिखकर वह छूट गया परंतु कुछ प्रश्न छोड़ गया। मसलन तीन वर्ष तक एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी नोएडा जैसे शहर में अवैध वसूली कैसे करता रहा?मान लीजिए कि सरकारी विभागों की हुज्जत से भयभीत रहने वाले उद्यमी या दुकानदार आसानी से किसी से भी ब्लैकमेल हो जाते हैं परन्तु असली फायरकर्मी इन तीन वर्षों में एक बार भी अग्नि सुरक्षा को जांचने नहीं आए। यदि आते तो नकली फायरकर्मी की पोल पहले ही खुल जाती।लखनऊ के अलीगंज की एक इमारत में गत 22 जून को आग लगने के परिणामस्वरूप 15 लोगों की मौत और गत 15 जुलाई को नोएडा के मामूरा गांव की एक बहुमंजिली इमारत में लगी आग से दो लोगों की मौत कैसी घटनाएं हैं?ये दोनों इमारतें झुग्गी बस्ती नहीं थीं जहां कोई व्यवस्था काम नहीं करती है।ये दोनों पक्की बहुमंजिला इमारतें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और आर्थिक राजधानी नोएडा की हैं। क्या इन इमारतों में भी फर्जी फायरकर्मी फर्जी अग्नि सुरक्षा को प्रमाणित कर रहे होंगे? एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी ने बताया कि नोएडा के फायर विभाग में दिनभर पैसा बरसता है। अनापत्ति देने और आपत्ति न करने के नाम पर पैसा ही पैसा है।आग लगने पर जांच की दिशा और दशा तय करने की भी मुंहमांगी कीमत मिलती है। नोएडा जैसे शहर औद्योगिक होने के कारण अनियोजित आबादी के भी शिकार हैं। यहां मापदंड के आधार पर व्यवस्था लागू करना असंभव जैसा है। परंतु जांच पड़ताल के बहाने से स्थिति को नियंत्रण में तो रखा ही जा सकता है। परंतु जहां धन वर्षा होती है वहां व्यवस्था बनाने की बात गौण हो जाती है।इसी अव्यवस्था में सेवानिवृत्त फायरकर्मी वर्षों तक अवैध वसूली में सफलता अर्जित करता रहता है।(नेक दृष्टि)

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