भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष नवाब सिंह नागर: *लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई

_-राजेश बैरागी-_

2009 का आम चुनाव भाजपा ने जनता की कृपा को लक्ष्य बनाकर लड़ा था। भाजपा को लगता था कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के रूप में जनता पर सामान्य प्रभाव डालने में विफल रहे हैं,सो उसका सामान्य प्रयास ही उसे सत्ता तक पहुंचा देगा।उसका यह अनुमान गलत साबित हुआ और देशभर के साथ गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट भी भाजपा हार गयी। इस सीट पर डॉ महेश शर्मा प्रत्याशी थे। क्या उन्हें केवल तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों ने हराया था या कोई और भी ऐसे महत्वपूर्ण कारक थे जिन्होंने उनकी हार को सुनिश्चित कर दिया था?तब चर्चा रही कि चुनाव प्रचार के दौरान नवाब सिंह नागर ने गुर्जर मतदाताओं को अपनी बिरादरी के प्रत्याशी को जिताने के लिए प्रेरित किया। एक हार के बाद डॉ महेश शर्मा 2014,2019 और 2024 में इसी सीट पर जीतने की हैट्रिक लगा चुके हैं परन्तु नवाब सिंह नागर अपनी लम्हों में की गई कथित खता की पिछले सत्रह वर्षों से सजा भुगत रहे थे। हालांकि उन्होंने इस दौरान भी अपना सामाजिक संपर्क जीवित रखा।नवाब सिंह नागर गौतमबुद्धनगर के उन गिनती के भाजपाईयों में से एक हैं जिन्होंने न केवल यहां इस पार्टी को अपने खून पसीने से सींचा बल्कि पार्टी अर्श पर रही या फर्श पर आ गई,वे कहीं नहीं गये। सज्जन और मिलनसार नवाब सिंह नागर उस दौर में लगातार तीन बार दादरी नोएडा विधायक चुने गए जब थोड़े थोड़े अंतराल से सरकारें गिर रही थीं। मैं उनके संघर्ष का साक्षी हूं जब वो नोएडा के सेक्टर-2 में एक खंडहर जैसी फैक्ट्री को जीवनयापन के लिए चलाते भी थे और उसी में रहते भी थे। एक बार उनके एक निकटतम साथी कार्यकर्ता ने उनके नाम के आगे चौधरी लिखने का प्रस्ताव दिया तो उन्होंने उसे विनम्रता से मना कर दिया। नोएडा ग्रेटर नोएडा और यीडा में किसानों को मिल रहे आबादी आवासीय भूखंड नवाब सिंह नागर और तत्कालीन सांसद अशोक प्रधान के संयुक्त प्रयासों का ही परिणाम है।बीते कल उन्हें भाजपा ने अपना पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया है। उनके सांगठनिक कौशल पर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। गुर्जर बिरादरी समेत उनकी स्वीकार्यता सभी समाजों में है। समाजवादी पार्टी की गत 29 मार्च को दादरी में की गई गुर्जर महारैली का भाजपा इससे अच्छा जवाब नहीं दे सकती थी। क्या नवाब सिंह नागर अपने सत्रह वर्षों के अघोषित राजनीतिक निर्वासन में डॉ महेश शर्मा की भूमिका को भूलकर आगे बढ़ेंगे?2024 के लोकसभा चुनाव में डॉ महेश शर्मा ने सपत्नीक नवाब सिंह नागर के घर जाकर समर्थन मांगने से संभवतः ‘बीती ताहि बिसार दे’ जैसी भूमिका पहले ही बन चुकी थी। हालांकि बताया जा रहा है कि डॉ महेश शर्मा क्षेत्रीय अध्यक्ष के लिए किसी अन्य कार्यकर्ता के नाम को आगे बढ़ा रहे थे परन्तु शीर्ष नेतृत्व ने नवाब सिंह नागर के नाम पर मुहर लगाई। क्या नवाब सिंह नागर दादरी विधानसभा सीट पर वर्तमान विधायक तेजपाल सिंह नागर को तीसरी बार टिकट हासिल करने से रोकने का प्रयास करेंगे? भाजपा के अलग-अलग खेमों में इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या लंबे निर्वासन के बाद संगठन के महत्व के पद पर मनोनीत होने वाले नवाब सिंह नागर पहले की भांति सज्जन और मिलनसार बने रहेंगे? मेरी व्यक्तिगत राय है कि उनके इन्हीं गुणों ने उनकी वापसी कराई है। लिहाजा उन्हें अपने मूल चरित्र से नहीं भटकना चाहिए।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)

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