(व्यंग) वकील साहब का तोता*

_-राजेश बैरागी-_

आगरा की पहचान क्या है? आगरा कभी मुगलिया सल्तनत की राजधानी रहा था।विश्वप्रसिद्ध ताजमहल आगरा में ही है। उत्तर भारत में आगरा का पागलखाना भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। आगरा जाने वाले व्यक्ति से लोग आपस में मजाक करते हैं कि सबकुछ ठीक तो है।उसी विख्यात आगरा में एक वकील साहब का प्रिय तोता बिना बताए कहीं चला गया है। वकील साहब ने उसे बहुत प्रेम से पाला पोसा था।वे और उनका परिवार उसे माऊ कहकर पुकारते थे और अपने भाग्य पर इतराते थे। तोता उनके प्रेम को कैसे और कितना मानता था,यह राज तोते के साथ चला गया है।कुल मिलाकर वकील साहब और उनके परिवार की जान उस तोते में थी। क्या किसी ने वकील साहब को सपरिवार कष्ट देने के लिए तोते को अगवा कर लिया है? यदि ऐसी जरा भी आशंका हो तो वकील साहब को अपने पिछले कुछ समय की वकालत के अभिलेखों को खंगालने की आवश्यकता है जिनसे यह पता लगाया जा सके कि उनकी दलीलों से अदालत ने किस किस को सजा से नवाजा था। इसके बाद यह जानना आवश्यक होगा कि उनमें से कौन जेल से बाहर आ चुका है और कौन अंदर है।जेल के अंदर से भी तोते को अगवा करने की साजिशें रची जा सकती हैं।जेल प्रशासन को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि अपहरण किसका और कौन करेगा।उसे ऐसी साहसिक वारदात करने वाले कैदी को केवल बाहरी दुनिया से संपर्क करने की सुविधा देनी होती है। एक जेल यात्री कल बता रहे थे कि न्यायिक अधिकारी जमानतें खारिज करने के लिए जेल प्रशासन से नजराना वसूलते हैं। मुझमें उनकी इस सूचना को स्वीकारने या खारिज करने का साहस नहीं है। तोता अपने आप आजादी की हवा खाने के लिए उड़ गया है या उसे किसी ने उड़ा लिया है,यह पुलिस के साथ साथ एसआईटी की जांच का विषय हो सकता है। आजकल सरकारें पुलिस से अधिक एस आई टी जैसी विशेष निर्देशित एजेंसी पर विश्वास करने लगी हैं। पुलिस की जांच न्यायालयों द्वारा परीक्षण के दायरे में आ जाती है।एस आई टी की जांच रिपोर्ट सरकारों के संज्ञान लेने के विशेषाधिकार की मोहताज होती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वकील साहब और उनके परिवार ने तोते को वापस लाने वाले को पचास हजार रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा वाले पोस्टर शहर भर में लगवाए हैं। पुरस्कार की राशि और शहर भर में पोस्टर लगवाने से वकील साहब और उनके परिवार का तोता प्रेम असंदिग्ध रूप से प्रमाणित हो रहा है। हालांकि एक मित्र जो पहले तोता पालने का शौक रखते थे, ने बताया कि अच्छे अच्छों के हाथों में से भी तोते उड़ जाते हैं। वैसे भी किसी समस्या के लंबा खिंचने पर उससे पीड़ित व्यक्ति यही कहने लगता है कि उसने यह क्या तोता पाल लिया। हालांकि तोता पालने वाला ही बता सकता है कि उसने तोता क्यों पाला था और अब जब तोता उड़ गया है तो उसे कैसा अनुभव हो रहा है।(नेक दृष्टि)

(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *