श्रावण मास की कांवड़ यात्रा संपन्न *हर हर महादेव-घर घर महादेव*

_-राजेश बैरागी-_

हालांकि मैं निजी तौर पर ऐसी धार्मिक गतिविधियों का समर्थक नहीं हूं परंतु इससे लाखों लोगों द्वारा की जाने वाली कांवड़ यात्रा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। एक पत्रकार साथी ने बताया कि नीट परीक्षा में अच्छे खासे नंबर लाने के बावजूद आरक्षण के चक्रव्यूह से पार न पाने वाली एक बेटी ने अंततः कांवड़ उठा ली। यह बेटी 61 लीटर गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी। एक धार्मिक आस्था वाले भाई ने अपनी बहिन को पुत्र प्राप्ति के लक्ष्य से 251 लीटर गंगाजल अपने कंधों पर उठा लिया। एक और युवक 301 लीटर गंगाजल कांवड़ में लेकर यात्रा कर रहा था। कुछ सुपुत्र माता पिता को कांवड़ में बैठाकर चल रहे हैं।समान संख्या में तो नहीं परंतु एक बड़ी संख्या महिला कांवड़ियों की भी जिन्हें पैदल जल लेकर यात्रा करते देखना प्रेरित करता है।दो दिन पहले हरिद्वार पुलिस ने ऐसे तीन लड़कों को पकड़ा जो पूरे एक सौ साइलेंसर युक्त मोटरसाइकिल पर सवार होकर कांवड़ उठाने आए थे। कांवड़ यात्रा में एक सैकड़ा साइलेंसर युक्त मोटरसाइकिल की क्या भूमिका हो सकती है?आस्था के सैलाब में ऐसी छोटी मोटी घटनाओं का कोई महत्व नहीं है। कांवड़ यात्रा को उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार का पूरा संरक्षण रहता है। सभी सरकारी स्थानीय निकाय अपनी अपनी क्षमताओं में कांवड़ यात्रियों के लिए सुख सुविधाओं की व्यवस्था करने में लगी रहीं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरणों ने कांवड़ यात्रियों की सुख सुविधा का पूरा ध्यान रखा। न केवल पथ और पथ प्रकाश की व्यवस्था की गई बल्कि यमुना प्राधिकरण के अभियंता देर रात तक अपने क्षेत्र के कांवड़ मार्ग पर खड़े रहकर यात्रियों की सुख सुविधा में जुटे रहे। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और गाजियाबाद नगर निगम ने तो कांवड़ यात्रियों के लिए शिविर लगाने से लेकर पुष्प वर्षा तक की व्यवस्था की। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रियों के जत्थों को भी पूरे मान सम्मान के साथ विदाई दी जा रही है। कांवड़ यात्रा में कौन लोग शामिल होते हैं?मेरा निजी मत है कि इसमें 20 प्रतिशत से भी कम लोग किसी संकल्प या धार्मिक आस्था के साथ शामिल होते हैं।शेष लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ा मनोरंजन का साधन है जिसमें पूरी उन्मुक्तता के साथ लगभग एक सप्ताह तक खुली सड़क पर रहने की छूट रहती है। ऐसे लोग घर पर कैसे रहते हैं? एक साथी पत्रकार का सुझाव है कि इस अवसर का उपयोग किसी नगर या गांव के तालाब को गंगाजल से भरने के लिए किया जा सकता है। हालांकि अमृत सरोवर योजना के जारी रहने के बावजूद गांव और शहर में तालाब खोजना भी एक बड़ा टास्क हो सकता है।(नेक दृष्टि)

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