मेरी गोरखपुर यात्रा (2) *अंग्रेजों के शासनकाल के समय का ऐतिहासिक जनपद गोरखपुर*

_-राजेश बैरागी-

मैं जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा तो श्रीमान जिलाधिकारी महोदय दीपक मीणा जी फरियादियों की शिकायतें सुन रहे थे। मैं अक्सर देखता हूं कि जिले बदल जाने से लोगों की शिकायतें ज्यादा नहीं बदलतीं।वही जमीनों के झगड़े, पुलिस की उपेक्षा, लेखपालों का पक्षपात और लाइसेंसों की प्रार्थना। यहां भी यही सब था। हां जिलों की हैसियत से वहां के लोगों के हितों का स्तर बदल जाता है। एक दीन-हीन महिला जिलाधिकारी से अपनी किसी समस्या का रोना रो रही थी। एक बुजुर्ग भी यहां वहां सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम न मिलने की पीड़ा बता रहे थे। कुछ पहुंच वाले लोग दरम्यानी आयु के जिलाधिकारी ने सभी की बात धैर्यपूर्वक सुनी और यथासंभव समाधान करने का प्रयास किया। हालांकि उन्हें और अन्य जिलाधिकारियों को जनसुनवाई करते हुए देखकर मुझे यह अनुभव हुआ है कि जनपद का सर्वोच्च अधिकारी होने के बावजूद जिलाधिकारी के पास कोई जादुई चिराग नहीं होता है कि रगड़े और समस्याओं का तुरंत समाधान कर दे।वे निचले अधिकारियों की रिपोर्ट पर आश्रित होते हैं और उनके लाख चाहने पर भी निचले अधिकारी अपनी मर्जी की ही रिपोर्ट देते हैं। लिहाजा समस्याएं समय बीतने के बाद भी जस की तस बनी रहती हैं। गोरखपुर अंग्रेजी शासनकाल में जिला बना था।1940 में गठन के पश्चात इस जिले के सात जिलाधिकारी अंग्रेज थे जो आईसीएस थे।श्री डीपी सिंह मार्च 1947 में नियुक्त होने वाले पहले भारतीय जिलाधिकारी थे जो आईएएस थे। गोरखपुर का प्रशासनिक जिला मुख्यालय फिलहाल निर्माणाधीन है और वर्तमान में यह एक अन्य प्रशासनिक भवन में संचालित है। गोरखपुर नगर निगम कार्यालय का बुलंद भवन है और उसका काम भी। गोरखपुर विकास प्राधिकरण जाने का अवसर नहीं मिला। गोरखपुर आयुक्त कार्यालय भवन संभवतः अंग्रेजी शासनकाल का ही बना हुआ है और यहां अधिवक्ताओं को बैठने की व्यवस्था अस्थाई ही है। दीनदयाल उपाध्याय  गोरखपुर विश्वविद्यालय 1957 में स्थापित हुआ था। यह बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय या अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जितना पुराना तो नहीं है परंतु है खूब विशाल लगभग तीन सौ एकड़ में। इस विश्वविद्यालय में अपनी साथियों के साथ घूम रही एक छात्रा से मैंने पूछा,-तुम्हारे विश्वविद्यालय के कुलपति कौन हैं? एक क्षण सोचने के बाद उसने बताया,- प्रोफेसर पूनम टंडन। मैंने अगला प्रश्न पूछा,-और कुलाधिपति? इस प्रश्न का उत्तर उसे पता नहीं था।वह स्नातकोत्तर की छात्रा थी। वर्तमान में इस विश्वविद्यालय की आंतरिक सड़कें बनाए जाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। नगर के दक्षिण पूर्वी भाग में रामगढ़ ताल है जो एक विशाल जलाशय होने के साथ इस नगर की जल विरासत भी है परंतु इसके किनारों पर बहुमंजिला इमारतों का जाल बढ़ता जा रहा है। यहीं सर्किट हाउस और निकट ही हवाई अड्डा भी है जो मूल रूप से एक सैनिक हवाई अड्डा है। गोरखपुर महाराज(मुख्यमंत्री )का नगर है, इसलिए इसका विकास और देखभाल उसी स्तर की है।कई फ्लाईओवर और राजकीय उच्च मार्गों ने गोरखपुर की तस्वीर बदल दी है। मैं गौतमबुद्धनगर जनपद से आया हूं जहां ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी और नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा  करुणेश दोनों यहां के जिलाधिकारी रहे हैं। स्थानीय लोग दोनों अधिकारियों के बारे में गहरी श्रद्धा के साथ बात करते हैं। रवि कुमार एनजी यहां के मंडल आयुक्त भी रहे हैं। क्रमशः (नेक दृष्टि)

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