ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण वर्सेज स्थानीय नागरिक:विकास की दुर्दशा के छः उदाहरण

_-राजेश बैरागी-_

आज तड़के लगभग सवा तीन बजे ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौर सिटी मॉल के सामने एक जोरदार दुर्घटना हुई। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम वहां टूटी हुई एक सड़क को बना रही थी कि एक रईसजादे ने उनपर तेज रफ्तार कार चढ़ा दी। इससे चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उसने तेजी से कार वापस की और पीछे सड़क निर्माण में लगे एक और कर्मचारी को रौंद दिया। पांच लोगों को टक्कर मारकर वह रईसजादा अपनी लंबी गाड़ी लेकर भाग निकला। अनुमान है कि वह सुबह तक चलने वाले आसपास के किसी बार से शराब पीकर निकला था और नशे की झौंक में अनियंत्रित कार चलाकर उसने इस घटना को अंजाम दिया। इस घटना के परिणामस्वरूप टूटी सड़क का निर्माण अधूरा रह गया, रेडी मिक्स कंक्रीट पड़ी रह गई और ठेकेदार तथा प्राधिकरण के अधिकारी अपने घायल श्रमिकों को लेकर अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। दूसरा मामला सूरजपुर का है जहां दादरी नोएडा मुख्य मार्ग को ऊंचा उठाकर बनाने की प्रक्रिया महीनों से चल रही है। नोएडा जाने वाली साइड किसी प्रकार तैयार भी हो गई है परंतु आने वाली साइड बनाने में वहीं के दुकानदार और निवासी बाधक बने हुए हैं। सड़क पर अतिक्रमण कर बैठे दुकानदार टस से मस होने को तैयार नहीं हैं।सीसी रोड को 28 दिनों तक तराई मिलनी चाहिए परन्तु आठ घंटे भी लोग रुकने को तैयार नहीं हैं। रोड बनवाने के लिए शोर शराबा करने वाले व्यापारी और सामाजिक संगठन सहयोग करने के स्थान पर विरोध करते रहते हैं। यही सड़क तिलपता गांव में पहुंचकर पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में आ जाती है। यदि लोगों का वश चले तो दोनों ओर से दुकानें बढ़कर सेंट्रल वर्ज तक आ जाएं। प्राधिकरण यहां लंबे समय से सड़क और नाला बना रहा है परंतु लोगों की हठधर्मिता के चलते सफल नहीं हो पा रहा है। बारिश और बिना बारिश तिलपता गांव से गुजर रही दादरी सूरजपुर रोड पानी में डूबी रहती है। गंदगी, जलभराव और जाम से जूझने के बावजूद सड़क से हटने को कोई तैयार नहीं है। दर्जनों गांवों की जीवनरेखा बनने वाली सड़क वेदपुरा गांव में पहुंचकर अवैध कॉलोनियों से मात खा गयी है।130 मीटर रोड तोशा पिक्चर ट्यूब कंपनी के सेठों के स्वार्थ के चलते तिलपता गोलचक्कर के पास टूटी पड़ी है तो सूरजपुर कासना रोड से शारदा गोलचक्कर को जोड़ने वाली सड़क टी सिरीज़ कंपनी मालिकों के स्वार्थ के चलते अधूरी पड़ी हुई है। विकास की अपेक्षा रखना और विकास के साथ जुड़ना,दो अलग-अलग बातें हैं।ये तीनों प्रकरण बताते हैं कि विकास शहीद भगतसिंह की भांति होना तो अवश्य चाहिए परन्तु उसमें हमारी गांठ से कुछ लगना नहीं चाहिए।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)

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