हरिद्वार में गंगा के पावन घाट से

_-राजेश बैरागी-_

दो दिन पहले हमारी तैंतीसवीं वैवाहिक वर्षगांठ थी। यूं तो प्रत्येक वर्षगांठ का अपना महत्व है परंतु अन्य वर्षगांठों का प्रथम, पच्चीसवीं या पचासवीं वर्षगांठ जैसा महत्व नहीं होता है। हमने इस वर्षगांठ पर मां गंगा के स्नान का लक्ष्य रखा था जिसके सापेक्ष आज हरिद्वार आए।हर की पौड़ी पर असंख्य स्त्री पुरुष मां गंगा में डुबकी लगा रहे थे। मैं थोड़ी कम भीड़ या एकांत का अभिलाषी हूं जहां मैं मां गंगा का सानिध्य प्राप्त कर सकूं।जाते समय मायापुर में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के निरीक्षण भवन के निकट मामूली भीड़ वाला घाट दिखाई दिया था। मैंने वहां रुकने को कहा भी परंतु पत्नी को हर की पौड़ी पर ही स्नान की इच्छा देखकर गाड़ी आगे बढ़ गई थी। यहां मुख्य गंगनहर पर बैराज बने हैं जहां से मुख्य गंगनहर कई दिशाओं को बंट जाती है। हरिद्वार के भीम गौड़ा से निकली गंगनहर का इतिहास मात्र 184 बरस पुराना है परंतु यह हजारों साल के इतिहास पर भारी है।1837-38 में पड़े भयंकर अकाल से पुनः बचने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए इसे इंजीनियर लॉर्ड काटले ने 12 वर्ष में बनाया था। यह नहर उत्तर भारत में गंगा यमुना के दोआबे में जीवनदायिनी जलरेखा बन गई। ईस्ट इंडिया कंपनी को क्या मालूम था कि जिस ऐतिहासिक नहर का निर्माण वह सदियों के लिए करा रही है, उसपर उसका नियंत्रण अगले दस वर्ष भी नहीं रहेगा। बहरहाल अंग्रेजों ने जो भी भारत को अच्छा अच्छा दिया, उनमें से यह सबसे महत्वपूर्ण है। मैं बैराज के किनारे एक वटवृक्ष के नीचे एक तख्त पर बैठकर लगभग दो सौ साल से यूं ही बहे जा रही मां गंगा की इस एक अविरल धारा को रौद्र रूप में बहते देख रहा हूं। इसके किनारे रहने वाले लोगों को संभवतः यह कुछ प्रभावित न करती हो,परंतु उन लाखों किसान परिवारों को बेहद प्रभावित करती है जिनकी बीसियों पूर्व पुश्तों ने इसी जल अमृत से अपने अस्तित्व को बनाए रखा। जहां तक मेरे जैसे अधम अनुरागी भक्तों की बात है तो हम दर्शन पाकर ही धन्य हो उठते हैं। मेरे विचार से अंग्रेज उतने बुरे नहीं थे। दरअसल उन्होंने अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए ऐसे बहुत से पुण्य कर्म भी किए जो स्वदेशी सरकारें अभी भी नहीं करतीं।उनका स्वार्थ स्पष्ट था, उनकी नीयत को लेकर किसी को भी संदेह नहीं था।वे व्यापार करने आए थे और व्यापारी के साथ शासक भी बन बैठे। उनके जाने के बाद जो लोग आए उन्होंने स्वयं को सेवादार बताया और सोलहों आने स्वार्थी निकले।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.comदेखें)

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