उल्टा चोर कोतवाल को डांटे:ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पंचतारा निजी स्कूलों का सड़कों पर अवैध कब्जा, प्राधिकरण को धमकी


-राजेश बैरागी-
यह बात कभी समझ में नहीं आई कि चोर उल्टा होकर कोतवाल को कैसे डांट सकता है। परंतु ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चल रहे लगभग आधा दर्जन फाइव स्टार निजी स्कूलों ने इस कहावत की हकीकत को साबित कर दिया है।इन स्कूलों ने अपने परिसर में बस कार घुसाने के लिए तीन चार फुट ऊंचे रैंप बनाकर सड़क का वजूद ही खत्म कर दिया है और नोटिस देने पर ये निजी स्कूल प्राधिकरण के अधिकारियों को खुलेआम धमका रहे हैं।
हाल ही में काले धन से बनाए जाने के लिए प्रकाश में आया द विजडम ट्री स्कूल भी इन स्कूलों में शामिल हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर 16 में दो एसकेएस वर्ल्ड स्कूल,द विजडम ट्री स्कूल,द स्कूल ऑफ स्कॉलर्स, बीएलएस वर्ल्ड स्कूल संचालित हैं। ये सभी फाइवस्टार स्कूल हैं जिन्हें धनी लोगों के बच्चों को पढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया है। निस्संदेह करोड़ों रुपए की लागत से बने इन स्कूलों के मालिक भी धनी और रसूखदार ही होंगे।द विजडम ट्री स्कूल की सच्चाई उजागर हो ही गई है।इन स्कूलों ने नियम कानून को धता बताकर अपने सामने की सड़कों पर तीन से चार फुट ऊंचे रैंप बनाकर कब्जा कर लिया है। इनके आगे से निकलने के लिए इनके रैंप पर चढ़कर उतरना पड़ता है। इस संबंध में शिकायत होने पर प्राधिकरण द्वारा इन स्कूलों को नोटिस जारी कर रैंप हटाने के लिए कहा गया। आमतौर पर ऐसे नोटिस मिलने पर आम नागरिक में भय व्याप्त होता है।वह प्राधिकरण को मनाने के लिए माध्यम की तलाश में जुट जाता है और प्राधिकरण के समक्ष अपराधी की भांति पेश होकर दया की भीख मांगता है। यदि आवश्यक हो तो चढ़ावा भी चढ़ाता है और बात न बने तो अपने निर्माण को समेट भी लेता है।इन स्कूलों के मामले में बिल्कुल उल्टा है। उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत यहां चरितार्थ हो रही है। एक स्कूल ने प्राधिकरण के नोटिस पर लिखित कड़ा जवाब देकर नीची सड़क बनाने के लिए उल्टा लाखों रुपए मुआवजा मांगा है और नोटिस देने को गुस्ताखी बताते हुए प्राधिकरण की मजम्मत की है। एक अन्य स्कूल ने नोटिस देने के लिए प्राधिकरण पहुंच कर अधिकारियों को न केवल खरी खोटी सुनाई बल्कि नोटिस वापस लेने की चेतावनी भी दी। इस संबंध में पूछने पर प्राधिकरण अधिकारी बगलें झांकने लगते हैं और कार्रवाई के नाम पर बातचीत का विषय ही बदल देते हैं। यहां यह बताना गलत नहीं होगा कि इन स्कूलों का परोक्ष या प्रत्यक्ष संबंध सत्तारूढ़ राजनीतिक दल से बताया जाता है।(नेक दृष्टि)

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