
-राजेश बैरागी-
नेताओं को भाषण देना होता है। परंतु क्या आम जनता उनके भाषण सुनने आती है? नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन समारोह को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा तक विस्तार दिया गया था। दोनों नेताओं से पहले केंद्रीय उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने भाषण दिया।उनका भाषण जोश और जानकारी से भरपूर रहा। दक्षिण से होने के बावजूद उनकी अच्छी हिंदी सुनकर प्रसन्नता हुई। जनसभा में आये आम लोगों ने सामान्य बातचीत के दौरान कहा कि वे यहां मोदी योगी के लिए आए हैं। उनमें से भी अधिकांश ने योगी के लिए वहां आने की बात कही। योगी के भाषण में 25 नवंबर 2021 को शिलान्यास अवसर जैसी धार नहीं थी।तब उन्होंने इस क्षेत्र के गन्ने को जिन्ना पर महत्व दिया था। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने अपना भाषण प्रधानमंत्री की शान में कसीदे पढ़ने पर अधिक केंद्रित रखा। क्या लोग उनसे यही सुनने आए थे?मुझे अनुभव हुआ कि लोग उनका भाषण सुनने नहीं बल्कि उन्हें देखने आए थे। प्रधानमंत्री का भाषण समाचार पत्रों और चैनलों के लिए था। जनता उनका भाषण शुरू होते ही वहां से निकलने लगी। मीडियाकर्मियों ने उनका भाषण पत्रकारों के लिए बनाए गए मीडिया पंडाल में स्क्रीन पर सुना। वापसी में हम लोग टर्मिनल के सामने से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की ओर निकले। हवाई अड्डा उद्घाटन के लिए तैयार था या नहीं परंतु वहां अभी वैमानिक गतिविधियों को शुरू होने में समय लगेगा। मैं जानता था कि अभी नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो की अंतिम स्वीकृति बाकी है, इसके बावजूद हवाई अड्डा उद्घाटन समारोह का आनंद लिया। आमतौर पर सभी हवाई अड्डों को उद्घाटन के बाद सामान्य गतिविधियां चालू करने में समय लगता है। कभी यह समय महीने दो चार महीने का होता है और कभी कभी यह वर्षों में बदल जाता है।हिंडन सिविल एयरपोर्ट इस सच्चाई का एक उदाहरण है। हालांकि इस बारे में कोई संदेह नहीं कि आने वाले वर्षों में यह हवाई अड्डा इस क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित होगा। संभवतः यहां से कार्गो विमानों की उड़ान सबसे पहले शुरू होगी जिसकी आवश्यकता भी सबसे पहले होगी।(नेक दृष्टि)
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