राजेश बैरागी।नौंवी लोकसभा (1989-1991)में हापुड़ गाजियाबाद के सांसद रहे वरिष्ठ राजनेता किशन चंद त्यागी एक बार फिर अपना राजनीतिक दल बदलने जा रहे हैं।26 वर्षों तक जनता दल यूनाइटेड के शीर्ष नेताओं में शुमार रहे के सी त्यागी रविवार को दिल्ली में जयंत चौधरी की उपस्थिति में रालोद का हिस्सा बनने जा रहे हैं।जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद रहे त्यागी ने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली जाने के निर्णय के बाद जदयू को अलविदा कहने का फैसला किया है। बिहार तक सीमित जदयू में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नेता के लिए हालांकि कोई विशेष भूमिका नहीं हो सकती थी परंतु अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और आपातकाल के समय जॉर्ज फर्नांडिस,लालू, नीतीश, रामविलास पासवान सरीखे नेताओं के साथ रहे के सी त्यागी ने बीते 26 वर्षों में जदयू के साथ साथ देश की केंद्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाए रखी। नीतीश कुमार के संभावित पतन के दृष्टिगत उनका रालोद में जाने का फैसला खुद को सक्रिय राजनीति में बनाए रखने के लिए तो माना ही जा रहा है, आगामी समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी एक और पारी खेलने का भी संकेत दे रहा है। दरअसल रालोद पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित क्षेत्रीय राजनीतिक दल है।उसे यहां भी चुनाव जीतने के लिए किसी न किसी अन्य दल के सहारे की आवश्यकता पड़ती है। चौधरी चरण सिंह के बाद उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह और अब पौत्र जयंत चौधरी जाट बिरादरी के बीच भी वैसा प्रभाव कायम नहीं रख पाए हैं जैसा चौधरी चरणसिंह के समय रहता था। इस बीच भाकियू के टिकैत बंधू और भाजपा के सुनील बालियान जैसे नेताओं ने भी चौधरी चरणसिंह की विरासत में खूब सेंध लगाई है।के सी त्यागी के शामिल होने से रालोद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निश्चित ही लाभ मिलेगा। अभी रालोद भाजपा के गठबंधन में शामिल है। जयंत चौधरी मोदी सरकार-3 में मंत्री भी हैं। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में पूरी संभावना है कि रालोद और भाजपा मिलकर चुनाव लडेंगे। ऐसे में के सी त्यागी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।के सी त्यागी के रालोद में आगमन की सूचना से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों के भावी प्रत्याशियों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई हैं।इन सीटों में मोदीनगर, मुरादनगर,और सिवालखास सीटें प्रमुख हैं। भाजपा से गठबंधन में इन सीटों पर रालोद का दावा कई वर्तमान विधायकों और भावी प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ सकता है। माना जा रहा है कि के सी त्यागी इन सीटों पर अपने नजदीकी लोगों को टिकट दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा सकते हैं।
के सी त्यागी बनेंगे रालोद के हमसफर तो बदल सकते हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण











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