सूरजपुर(ग्रेटर नोएडा)के व्यापारियों का अनर्गल प्रलाप 

राजेश बैरागी।ग्रेटर नोएडा नगर के सूरजपुर कस्बे का इतिहास बहुत पुराना है। इसके इतिहास में झांकने से पहले 22 जनवरी 2024 के ऐतिहासिक दिन को याद करते हैं।उस दिन देशभर में राममंदिर के उद्घाटन की धूम मची हुई थी। नगर नगर भजन कीर्तन और भंडारे चल रहे थे। सूरजपुर कस्बे के व्यापारियों ने भी भंडारे का आयोजन किया था। उनमें से एक व्यापारी की दुकान पर मैं हार्डवेयर का कुछ सामान लेने के उद्देश्य से उपस्थित हुआ। व्यापारी उस समय दुकान पर ही बैठकर भंडारा खा रहा था।भंडारे की पूड़ी और आलू के साग का स्वाद ही अद्भुत होता है। व्यापारी उसी अद्भुत स्वाद का आनंद उठा रहा था। ग्राहक के रूप में मेरे उपस्थित होने से उसने शीघ्रता से भंडारे के प्रसाद को समाप्त किया और थर्मोकोल की पत्तल को दुकान के नीचे बह रही नाली के हवाले कर दिया। मैंने सामान की बाबत पूछने से पहले व्यापारी से पूछ लिया,-ये भंडारा क्यों किया जा रहा है? उसने पूरे उत्साह से उत्तर दिया,-आज अयोध्या में रामलला के मंदिर का उद्घाटन हो रहा है ना।’ मैंने आगे पूछा,-क्या रामलला उनके नाम पर भंडारा खा कर थर्मोकोल की पत्तल नाली में डालने से प्रसन्न होंगे?वह मेरे इस प्रश्न के लिए तैयार नहीं था। उससे या वहां के किसी भी व्यापारी से संभवतः किसी ने ऐसा प्रश्न किया नहीं होगा जबकि ये लोग प्रतिदिन अपनी दुकानों से निकलने वाले कूड़ा कचरे को नाली के हवाले करते रहते हैं और नालियां जब बेबस होकर सड़क पर फैलने लगती हैं तो यही व्यापारी लोग प्राधिकरण और प्रशासन को लानतें भेजने लगते हैं। गुरुवार को ऐसी ही शिकायतें लेकर सूरजपुर कस्बे के व्यापारी जिलाधिकारी मेधा रूपम से मिलने पहुंचे। हालांकि नोएडा ग्रेटर नोएडा या यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में नाली, सड़क की समस्याओं के समाधान का सीधा दायित्व जिलाधिकारी का नहीं है।हो सकता है कि व्यापारी नेता उनसे समस्याओं के बहाने अपनी जान पहचान बनाने के उद्देश्य से गये हों। उनमें से एक भी व्यापारी ने सड़क और नालियों की खस्ताहालत के लिए खुद को जिम्मेदार नहीं बताया। ऐसा जिस दिन हो जाएगा,देश, नगर, कस्बों को स्वर्ग का सौंदर्य प्राप्त हो जाएगा। जहां तक सूरजपुर के इतिहास की बात है तो यह कस्बा समृद्ध व्यापारियों के कारण कई बार उजड़ा है। व्यापारियों की समृद्धता के कारण चोर डाकुओं के लिए इस कस्बे का खूब आकर्षण रहता था।अब यह कस्बा व्यापारियों की असभ्यता से उजड़ा हुआ मालूम होता है। हालांकि यह सब लिखकर मैं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के संबंधित अभियंताओं को क्लीन चिट नहीं दे रहा हूं जो इस कस्बे के कायाकल्प की अनेक बार योजनाएं बना चुके हैं और कई बार बिल भी फाड़ चुके हैं परंतु कस्बे की फूटी किस्मत में कोई सुधार नहीं ला सके हैं।(

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