नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: उद्घाटन से पहले कुछ कहानियां कही अनकही (भाग -1)

राजेश बैरागी।इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बरअक्स मात्र 45 मील के फासले पर एशिया का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जनपद गौतमबुद्धनगर के जेवर क्षेत्र में अब जनसेवा के लिए तैयार है। यदि सबकुछ ठीक रहा तो आगामी अक्टूबर या नवंबर माह में संभवतः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महत्वाकांक्षी एयरपोर्ट का लोकार्पण करेंगे। हालांकि देश में अलग अलग बन रहे आधा दर्जन हवाई अड्डों में यह सबसे तेजी से बनने वाला एयरपोर्ट है, फिर भी इसकी शुरुआत बहुप्रतीक्षित रही है।25 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा शिलान्यास किए जाने के बाद ठीक लगभग चार वर्ष में बनकर तैयार होने वाले इस एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए कुल 1334 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई है। एयरपोर्ट के दायरे में आये छः गांवों का विस्थापन किया गया है।इन गांवों में रहने वाले 3074 परिवारों (हालांकि विस्थापित होने वाले वास्तविक परिवारों की संख्या इससे आधी से भी कम थी परंतु नये भूमि अधिग्रहण अधिनियम का पालन करते हुए प्रत्येक परिवार के 18 वर्ष से ऊपर के पुरुष सदस्य को स्वतंत्र पारिवारिक इकाई माना गया) को एक पूरा सेक्टर विकसित कर उसमें बसाया गया। एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की शुरुआत में कुछ लोग (खिच्चूराम आदि) उच्च न्यायालय चले गए।कुल आधा दर्जन रिट याचिकाएं दायर की गईं।रिट याचिकाओं में एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण पर सवाल उठाए गए। यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के साथ उत्तर प्रदेश सरकार को भी प्रतिवादी बनाया गया। एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी व यमुना प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी शैलेन्द्र भाटिया को बाकायदा राज्य सरकार और प्राधिकरण ने पैरोकार नियुक्त किया।उस समय इलाहाबाद में 2019 का अर्ध कुंभ चल रहा था। शैलेन्द्र भाटिया इलाहाबाद पहुंचे। एक सप्ताह वहीं कुंभ की टेंट सिटी में रहकर प्राधिकरण और राज्य सरकार की ओर से जवाब तैयार किया। उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष यह प्रश्न रिट याचिकाओं के लिए काल साबित हुआ कि एयरपोर्ट बनना चाहिए अथवा नहीं? उच्च न्यायालय को नोएडा ग्रेटर नोएडा व यमुना शहर के अलावा उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के आसपास के शहरों की भविष्य की आवागमन की आवश्यकताओं को तथ्यात्मक रूप से रेखांकित करते हुए एयरपोर्ट की आवश्यकता को बताया गया तो छहों रिट याचिकाएं खारिज कर दी गईं और एयरपोर्ट बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। क्रमशः

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